मांगें पूरी नहीं हुईं तो 6-7 अगस्त को ठप पड़ सकती हैं नगरीय सेवाएं, प्लेसमेंट कर्मचारियों ने संभाग स्तरीय हड़ताल का किया ऐलान
रायपुर।
छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में कार्यरत प्लेसमेंट, आउटसोर्स और ठेका कर्मचारियों ने अपनी वर्षों पुरानी मांगों को लेकर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। छत्तीसगढ़ नगरीय निकाय प्लेसमेंट कर्मचारी महासंघ ने राज्य सरकार पर कर्मचारियों की लगातार उपेक्षा का आरोप लगाते हुए 6 और 7 अगस्त 2026 को प्रदेशभर में दो दिवसीय संभाग स्तरीय हड़ताल और रैली आयोजित करने की घोषणा की है।
महासंघ का दावा है कि प्रदेश के 192 नगरीय निकायों—14 नगर निगम, 54 नगर पालिका और 124 नगर पंचायत—में करीब 20 हजार प्लेसमेंट, आउटसोर्स और ठेका कर्मचारी पिछले 15 से 20 वर्षों से सफाई, पेयजल, विद्युत, कार्यालयीन कार्य और अन्य आवश्यक नागरिक सेवाओं का संचालन कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों के समान वेतन और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष खेमूलाल निषाद और प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष संजय एडे सहित प्रदेश पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से कहा कि संगठन ने वर्षों से शासन के समक्ष शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखीं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। उनका कहना है कि समान कार्य करने के बावजूद अलग-अलग वेतनमान देना कर्मचारियों के साथ अन्याय है, जिससे व्यापक असंतोष व्याप्त है।
महासंघ ने सरकार के सामने दो प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालनालय में कार्यरत प्लेसमेंट कर्मचारियों की तर्ज पर सभी नगरीय निकायों के प्लेसमेंट कर्मचारियों को भी संविदा दर के अनुसार पारिश्रमिक दिया जाए। दूसरी, प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में चारों नई श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।
महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि सरकार जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। संगठन ने प्रदेश के सभी प्लेसमेंट कर्मचारियों से 6 और 7 अगस्त को आयोजित संभाग स्तरीय हड़ताल और रैली में बड़ी संख्या में शामिल होकर एकजुटता दिखाने की अपील की है।
यदि यह हड़ताल व्यापक स्तर पर सफल होती है तो नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में सफाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति, विद्युत रखरखाव और अन्य दैनिक नागरिक सेवाएं प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में अब कर्मचारियों की मांगों पर सरकार का रुख और आगे की बातचीत पर सभी की नजरें टिकी हैं।
