श्रमिक परिवारों के बच्चों को मिले उत्कृष्ट शिक्षा के अवसर, सपनों को पंख देना सरकार की प्राथमिकता : मुख्यमंत्री साय
अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत 200 प्रतिभावान बच्चों को प्रतिष्ठित आवासीय स्कूलों में निःशुल्क शिक्षा — 1.45 लाख श्रमिकों को 39.67 करोड़ से अधिक की सहायता राशि डीबीटी से जारी
रायपुर
श्रमिक परिवारों के प्रतिभावान बच्चों के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना नई उम्मीद और बेहतर भविष्य का माध्यम बन रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि श्रमिक प्रदेश के विकास की मजबूत नींव हैं। उनके परिश्रम से सड़कें, भवन, पुल और अन्य विकास कार्य आकार लेते हैं। ऐसे श्रमिक परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर देना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
राजधानी रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने योजना के तहत अध्ययनरत बच्चों से आत्मीय संवाद किया और शिक्षा, खेल, कला सहित विभिन्न गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया। इस दौरान विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के तहत 1 लाख 45 हजार 841 श्रमिकों के खातों में 39 करोड़ 67 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से अंतरित की गई।
100 से बढ़ाकर 200 बच्चों तक पहुंची योजना
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना की शुरुआत पिछले वर्ष 100 बच्चों के साथ की गई थी। इस वर्ष योजना का विस्तार करते हुए 200 प्रतिभावान बच्चों को इसमें शामिल किया गया है। प्रदेश के सभी 33 जिलों से चयनित श्रमिक परिवारों के बच्चे राजकुमार कॉलेज, दिल्ली पब्लिक स्कूल और रुंगटा पब्लिक स्कूल जैसे प्रतिष्ठित निजी आवासीय विद्यालयों में कक्षा 6वीं से 12वीं तक निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जिन विद्यालयों में अपने बच्चों को पढ़ाना श्रमिक परिवारों के लिए कभी कठिन सपना था, अब राज्य सरकार उसी सपने को साकार करने का प्रयास कर रही है। यह योजना केवल स्कूल में प्रवेश दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, आत्मविश्वास और अपनी प्रतिभा को निखारने के अवसर भी उपलब्ध करा रही है।
67 योजनाओं से श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रम विभाग के तीन मंडलों के माध्यम से श्रमिकों के लिए 67 प्रकार की कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, मातृत्व सहायता, दिव्यांग सहायता, पेंशन, कौशल विकास, रोजगार और आवास सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं।
श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में 774 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से श्रमिकों के खातों में सीधे पहुंचाई गई है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि आर्थिक परिस्थितियां श्रमिक परिवारों के बच्चों के सपनों के रास्ते में बाधा न बनें।
बच्चों से बोले मुख्यमंत्री—बड़े सपने देखें और खूब मेहनत करें
मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों से कहा कि वे बड़े सपने देखें और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी मेहनत करें। उन्होंने अपने जीवन के संघर्ष और अनुभव साझा करते हुए कहा कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, शिक्षा, परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर सफलता हासिल की जा सकती है।
उन्होंने बच्चों से कहा कि कोई डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक या प्रशासनिक अधिकारी बनना चाहता है तो कोई व्यवसाय, समाजसेवा या अन्य क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहता है। लक्ष्य कोई भी हो, उसकी मजबूत नींव शिक्षा ही है। उन्होंने विद्यार्थियों से देश और छत्तीसगढ़ की सेवा का संकल्प लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
बच्चों के साथ भोजन कर साझा किए अनुभव
कार्यक्रम का सबसे आत्मीय क्षण उस समय देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री ने श्रमिक परिवारों के बच्चों के साथ बैठकर भोजन किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों से खुलकर बातचीत की और उनके सवालों के जवाब दिए। बच्चों ने मुख्यमंत्री से उनके बचपन, पढ़ाई, पसंद और जीवन के संघर्षों से जुड़े सवाल पूछे।
मुख्यमंत्री ने बच्चों को अनुशासन, मेहनत और निरंतर सीखते रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि बच्चों की सफलता ही सरकार और उनके माता-पिता की सबसे बड़ी खुशी होगी।
आईएएस बनने का सपना, अंग्रेजी में बातचीत का बढ़ा आत्मविश्वास
समारोह में विद्यार्थियों ने योजना से मिले अवसरों के अनुभव भी साझा किए। बीजापुर के अतीश ने बताया कि प्रतिष्ठित विद्यालय में पढ़ने का अवसर उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने भविष्य में आईएएस अधिकारी बनकर देश और प्रदेश की सेवा करने की इच्छा व्यक्त की।
वहीं कबीरधाम की इशिका डाहरे ने बताया कि नए विद्यालय के वातावरण ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया है और अब वे अंग्रेजी में भी सहजता से बातचीत कर पा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिक परिवारों के बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल उन्हें सही अवसर और बेहतर मंच देने की है। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चे आगे बढ़ेंगे, तभी विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का सपना साकार होगा।
दूरस्थ क्षेत्रों में भी शिक्षा के नए द्वार
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित और दूरस्थ क्षेत्रों में भी शिक्षा और विकास की नई संभावनाएं तैयार की जा रही हैं। ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी जैसी पहल से बस्तर के बच्चों को भी बेहतर शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के किसी भी हिस्से में रहने वाला प्रतिभावान बच्चा केवल आर्थिक परिस्थितियों के कारण अपने सपनों से समझौता न करे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ में भी प्रत्येक वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया जा रहा है।
राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए विकसित छत्तीसगढ़ जरूरी है और इसके लिए प्रत्येक परिवार को विकास की यात्रा से जोड़ना होगा। डॉ. रामप्रताप सिंह ने भी श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा, उपाध्यक्ष किशोर महानंद, श्रम विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता सहित विभागीय अधिकारी, श्रमिक, अभिभावक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
