अनुपम गार्डन में कृष्ण जन्माष्टमी का उल्लास, राधा रानी के रूप में पहुंचे बच्चे
रायपुर। राजधानी शहर के मध्य स्थित अनुपम गार्डन में कृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में छोटे-छोटे बच्चे बाल गोपाल और राधा रानी के रूप में सज-धजकर पहुंचे। बच्चों ने बांसुरी के साथ भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का मनमोहक प्रदर्शन किया, जिसे देखकर उपस्थित लोग भावविभोर हो उठे।
अनुपम गार्डन में गूंजा कृष्ण भक्ति का रंग, बाल गोपाल-राधा रानी के रूप में सजे बच्चे
कार्यक्रम में बच्चों से लेकर युवा और बुजुर्गों तक सभी वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रार्थना के साथ हुई। शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य की कामना के साथ सामूहिक प्रार्थना की गई। इसके बाद कृष्ण भक्ति के गीतों पर पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। उपस्थित लोगों ने भजनों का आनंद लेते हुए भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में स्वयं को सराबोर किया।
इस अवसर पर रुंगटा कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण हिंदू धर्म के सबसे लोकप्रिय देवताओं में से एक हैं और उन्हें भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना जाता है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन केवल भक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके जीवन से नीति, धर्म, कर्तव्य और मानवता की भी सीख मिलती है।
कार्यक्रम के ग्रुप प्रमुख संतोष ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने की जरूरत है। श्रीकृष्ण एक कुशल राजनेता, मार्गदर्शक, सच्चे मित्र और प्रेम व भक्ति के प्रतीक रहे हैं। उन्होंने गीता के माध्यम से मानव जीवन को कर्म, धर्म और सत्य का मार्ग दिखाया तथा धर्म की स्थापना का संदेश दिया।
वहीं प्रो. राकेश साहू ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व अनेक गुणों से परिपूर्ण है। प्रेम और सहानुभूति, धैर्य एवं संयम, क्षमा, संकट के समय विचलित न होना, सत्य और नीति के मार्ग पर चलना तथा संसार और प्रकृति के कल्याण के प्रति समर्पण उनके जीवन से प्रेरणा लेने वाले प्रमुख गुण हैं। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण नित्य कला में निपुण और अलौकिक शक्ति से संपन्न माने जाते हैं। उनका जीवन मनुष्य को विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखते हुए सत्य और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम में बच्चों की कृष्ण-राधा की मनमोहक प्रस्तुतियों और भक्ति गीतों ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित इस आयोजन ने आपसी प्रेम, भाईचारे और आध्यात्मिक ऊर्जा का संदेश दिया।
