तीजन बाई की स्मृति में राज्य सरकार की बड़ी घोषणाएं, पंडवानी कला को मिलेगा नया सम्मान
रायपुर।
छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की अमर स्वर साधिका और पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रदेश के संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। इन घोषणाओं का उद्देश्य पंडवानी कला के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक इसकी विरासत पहुंचाना है।
ये है घोषणाएं
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में संस्कृति मंत्री ने घोषणा की कि पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई के नाम पर पंडवानी कला के क्षेत्र में प्रतिवर्ष राज्य सम्मान प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान पंडवानी विधा में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को दिया जाएगा, जिससे इस लोककला को नई पहचान और प्रोत्साहन मिलेगा।उन्होंने यह भी घोषणा की कि डॉ. तीजन बाई के पैतृक गांव गनियारी को ‘कला ग्राम’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इस पहल के तहत गांव में लोककला और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि गनियारी देशभर में लोक संस्कृति के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित हो सके।
इसके अलावा मंत्री ने कहा कि डॉ. तीजन बाई के जीवन और कला साधना के प्रतीक उनके प्रिय तंबूरे को रायपुर स्थित महंत घासीदास संग्रहालय परिसर में प्रदर्शित किया जाएगा। इससे आने वाली पीढ़ियां उनकी कला यात्रा और योगदान से प्रेरणा ले सकेंगी।संस्कृति मंत्री ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने पंडवानी को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। राज्य सरकार उनकी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और आगे बढ़ाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगी।इन घोषणाओं को छत्तीसगढ़ की लोककला और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
