स्वास्थ्य कर्मचारियों का प्रदर्शन: निजीकरण, आउटसोर्सिंग और लंबित मांगों के विरोध में कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

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रायपुर।

छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ की जिला शाखा ने बुधवार को अपनी विभिन्न लंबित मांगों और स्वास्थ्य विभाग में निजीकरण, आउटसोर्सिंग तथा ठेका प्रथा के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने अर्जुन नगर स्थित संघ कार्यालय से रैली निकालकर घड़ी चौक तक मार्च किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव के नाम संबोधित ज्ञापन रायपुर कलेक्टर को सौंपा गया।
संघ ने ज्ञापन के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की वर्षों से लंबित मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि विभाग द्वारा वेतन पुनरीक्षण का प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित है, जिस पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आठवें वेतन आयोग के लागू होने की स्थिति में कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
संघ ने स्वास्थ्य विभाग के तकनीकी एवं अन्य पदों पर निजीकरण, ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग का विरोध करते हुए कहा कि पैथोलॉजी और फार्मेसी जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं को ठेके पर देने से न केवल नियमित कर्मचारियों का भविष्य प्रभावित होगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
ज्ञापन में प्रदेश के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में रिक्त पड़े 35 से 40 प्रतिशत पदों पर तत्काल सीधी भर्ती शुरू करने की मांग भी उठाई गई। संघ का कहना है कि बड़ी संख्या में पद खाली होने से अस्पतालों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में कठिनाई हो रही है।
स्वास्थ्य कर्मचारियों ने संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए ‘समान कार्य, समान वेतन’ की स्पष्ट नीति बनाने, जीवनदीप समिति के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों के मानदेय में पूरे प्रदेश में एकरूपता लागू करने तथा जिन संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की सेवाओं की निरंतर आवश्यकता है, उनके लिए नियमित पद स्वीकृत करने की भी मांग की।
संघ ने स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्यरत चिकित्सकों, नर्सों और पैरामेडिकल कर्मियों के लिए अनिवार्य पंजीयन व्यवस्था लागू करने की मांग भी की, ताकि प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों का भविष्य सुरक्षित हो सके और फर्जी डिग्री एवं डिप्लोमा धारकों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
जिलाध्यक्ष सालिक नौरंगें ने कहा कि यह आंदोलन का पहला चरण है, जिसके माध्यम से सरकार का ध्यान कर्मचारियों की समस्याओं की ओर आकर्षित किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर समय रहते सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक तथा उग्र रूप दिया जाएगा।
इस प्रदर्शन में संघ के प्रांतीय संरक्षक ओ.पी. शर्मा, प्रांतीय महामंत्री एस.पी. देवांगन, प्रांतीय कोषाध्यक्ष राजेन्द्र यादव, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बी.के. शुक्ला, प्रांतीय सचिव अरविंद चंद्राकर सहित विभिन्न प्रकोष्ठों और जिलों के पदाधिकारी तथा सैकड़ों स्वास्थ्य कर्मचारी मौजूद रहे।

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