प्रतिष्ठा और व्यक्तित्व अधिकारों के हनन का लगाया था आरोप
फर्जी सोशल मीडिया हैंडल्स और प्लेटफॉर्म्स को नोटिस, जवाब तलब बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने विधायक एवं छत्तीसगढ़ी अभिनेता अनुज शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित रूप से चलाए जा रहे ट्रोलिंग अभियान को गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले को संवेदनशील मानते हुए अनुज शर्मा और उनके परिवार से जुड़ी मॉर्फ तस्वीरें, एडिटेड वीडियो, अश्लील टिप्पणियां, कैरिकेचर तथा अन्य आपत्तिजनक सामग्री को तत्काल हटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और ऐसे कंटेंट अपलोड करने वाले फर्जी अकाउंट्स को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने याचिका क्रमांक 3836/2026 पर की। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वाई.सी. शर्मा ने पक्ष रखा। याचिका में आरोप लगाया गया था कि सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर विधायक अनुज शर्मा और उनके परिवार को निशाना बनाकर लगातार अपमानजनक, भ्रामक और अश्लील सामग्री प्रसारित की जा रही है। इसमें मॉर्फ फोटो, एडिटेड वीडियो, आपत्तिजनक मीम्स और कैरिकेचर शामिल हैं, जिससे उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा, सार्वजनिक छवि और व्यक्तित्व अधिकार (Personality Rights) का गंभीर उल्लंघन हो रहा है। प्रथम दृष्टया तथ्यों को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित सामग्री को तत्काल हटाने के निर्देश दिए। साथ ही सोशल मीडिया कंपनियों और संबंधित अकाउंट संचालकों को नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ उचित कार्रवाई क्यों न की जाए। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह आदेश सोशल मीडिया पर फर्जी और आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा और निजता का हनन स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस अंतरिम आदेश के बाद अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर रहेगी, जहां सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर हाईकोर्ट आगे की कार्रवाई तय करेगा। यह मामला सोशल मीडिया पर बढ़ते दुष्प्रचार, मॉर्फ कंटेंट और ऑनलाइन ट्रोलिंग के खिलाफ न्यायिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है।