जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती जी महाराज का चातुर्मास्य अनुष्ठान छत्तीसगढ़ में करेंगे
रायपुर।
छत्तीसगढ़ सनातन धर्म के सर्वोच्च आध्यात्मिक पीठों में से एक ज्योतिष्पीठ (बकि के शंकराचार्य, परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तरामनाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज 1008 इस वर्ष संवत् 2083 विक्रमी आषाढ़ पूर्णिमा (गुरुपूर्णिमा) दिनांक 29 जुलाई 2026 दिन बुधवार से भाद्रपद पूर्णिमा दिनांक 25 सितंबर 2026 पर्यन्त तक का धातुमौस्य अनुष्ठान विश्व के सबसे बड़े निर्माणाधीन सवा लाख शिवलिंग मंदिर सपादशेश्वर धाम ग्राम सलधा बेमेतरा छत्तीसगढ़ में संपन्न करेंगे। उनके छत्तीसगढ़ आगमन से प्रदेश के संत समाज बद्धालुओं एवं सनातन धर्मावलंबियों में विशेष उत्साह का वातावरण है।
चातुर्मास्य हिंदू धर्म की एक अत्यंत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक परंपरा है। आषाढ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक का समय साधना, तप, स्वाध्याय, धर्मोपदेश एवं लोककल्याण के विविध अनुष्ठानों के लिए समर्पित माना जाता है। इस अवधि में संत महात्मा एक स्थान पर निवास कर धर्म, संस्कृति एवं आध्यात्मिक मूल्यों के संवर्धन हेतु विविध कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती जी महाराज के प्रवास के दौरान प्रतिदिन वेद-पुराण प्रवचन, धर्मसभा, गौसंरक्षण पर विचार-विमर्श, राष्ट्र एवं समाजहित के विषयों पर मार्गदर्शन, सनातन धर्म जागरण तथा श्रद्धालुओं के लिए आशीर्वचन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस अवसर पर देशभर से संत, विद्वान एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के छत्तीसगढ़ पहुंचने की संभावना है।
दंडी स्वामी इन्दुभवानंद तीर्थ जी महाराज के अनुसार यह हम समस्त प्रदेशवासियों के लिए बहुत ही सौभाग्य का छड है सावरात शिव स्वरूप, नारायण शंकराचार्य भगवान जी का आगमन हो रहा है, चातुर्मास्य अनुष्ठान छत्तीसगढ़ के धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक जीवन एवं राज्य जिला गावो के कल्याण में एक ऐतिहासिक अध्याय सिद्ध होगा। इससे प्रदेश में सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ सामाजिक समरसता, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना को नई ऊर्जा प्राप्त होगी। आयोजन को लेकर प्रदेश के हर जिलों में गाव गाव पहुंचकर आमंत्रण दिया गया है, वही गुरु परंपरा का निर्वहन करने वाले देश विदेश से भी बद्धालु दर्शन लाभ लेने पहुंचैगे, समिति द्वारा लगातार भण्डारा की रहने की सम्पूर्ण व्यवस्था किया गया है। वही समस्त धर्मप्रेमी नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे इस दिव्य एवं ऐतिहासिक चातुर्मास्य अनुष्ठान में अधिक से अधिक संख्या में सहभागी बनकर जगद्गुरु शंकराचार्य जी के श्रीमुख से धर्मोपदेश का लाभ प्राप्त करें तथा कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाएं। इस अवसर पर ज्योतिर्मठ के सीएफओं मदन उपाध्याय एवं मीडिया प्रभारी अशोक साहू उपस्थित रहे।
