मीना खलखो हत्याकांड में दो जवानों को राहत, हाईकोर्ट ने बरी करने का फैसला रखा बरकरार
बिलासपुर। बहुचर्चित मीना खलखो हत्याकांड मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दो सशस्त्र बल के जवानों को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी जवान धर्मदत्त धनिया और जीवनलाल रत्नाकर को बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि मीना खलखो की मौत जिस गोली से हुई थी, वह आरोपियों के हथियार से चली थी। अभियोजन की ओर से आरोपों को साबित करने के लिए पेश किए गए साक्ष्यों और परिस्थितियों को अदालत ने पर्याप्त नहीं माना।
अदालत के समक्ष सबसे अहम सवाल गोली और आरोपियों के हथियार के बीच संबंध स्थापित करने का था। हाईकोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष यह निर्णायक रूप से साबित नहीं कर सका कि घटनास्थल से संबंधित गोली आरोपी जवानों के हथियार से ही चली थी। ऐसे में संदेह का लाभ आरोपियों को दिया जाना उचित माना गया।
ट्रायल कोर्ट ने भी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों जवानों को बरी किया था। इस फैसले के खिलाफ आगे की कानूनी कार्यवाही के दौरान हाईकोर्ट ने निचली अदालत के निर्णय में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए उसे बरकरार रखा।
मीना खलखो हत्याकांड लंबे समय से प्रदेश में चर्चित रहा है। मामले में न्यायिक प्रक्रिया के दौरान साक्ष्यों, फोरेंसिक जांच और आरोपियों के हथियार से चली गोली के संबंध को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठते रहे। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल दोनों आरोपी जवानों को बड़ी कानूनी राहत मिली है।
अदालत का अहम निष्कर्ष: अभियोजन यह प्रमाणित नहीं कर पाया कि मीना खलखो की मौत के लिए जिम्मेदार गोली धर्मदत्त धनिया और जीवनलाल रत्नाकर के हथियार से चली थी। इसी आधार पर दोनों को बरी किए जाने का फैसला बरकरार रखा गया।
