वीआईपी गाड़ी गड्ढे में फंसी तो जागा सिस्टम, भाजपा संगठन महामंत्री ने अधिकारियों को लगाई फटकार
सीतापुर के पास NH-3 पर दो घंटे तक फंसी इनोवा, सड़क की बदहाली पर जताई नाराजगी; अगली सुबह शुरू हुआ गड्ढों की मरम्मत का काम
अंबिकापुर/सीतापुर।
भारी बारिश के बीच बदहाल सड़कों और जगह-जगह बने गड्ढों की समस्या अब आम लोगों के साथ-साथ नेताओं और जनप्रतिनिधियों के लिए भी परेशानी का कारण बनने लगी है। जयपुर से अंबिकापुर जा रहे भाजपा के संगठन महामंत्री पवन साय की इनोवा कार सीतापुर के पास NH-3 पर सड़क के बड़े गड्ढे में फंस गई। वाहन को निकालने के लिए स्थानीय लोगों और मैकेनिकों को करीब दो घंटे तक कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। इस घटना के बाद पवन सिंह ने सड़क की बदहाली को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों पर जमकर नाराजगी जताई।
बताया जाता है कि वाहन गड्ढे में फंसने के बाद भाजपा संगठन महामंत्री पवन साय ने सर्किट हाउस पहुंचकर अधिकारियों से संपर्क किया। उन्होंने प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी को फोन कर सड़क की स्थिति को लेकर नाराजगी जाहिर की। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों को भी फोन लगाकर सड़क की बदहाली पर जमकर फटकार लगाई।
‘जब नेता ही ठेकेदार हैं तो श्रमदान क्यों नहीं करते?’
सड़क की स्थिति को लेकर पवन साय के तेवर काफी सख्त बताए जा रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से सवाल किया कि जब सड़क निर्माण और ठेकेदारी से जुड़े लोग राजनीतिक रूप से प्रभावशाली हैं, तो सड़क के गड्ढे भरने और लोगों को राहत देने के लिए आगे क्यों नहीं आते? उन्होंने कथित तौर पर पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल के समक्ष भी इस मामले को लेकर नाराजगी जताई और कहा कि यदि ठेकेदार नेता हैं तो उन्हें कम से कम श्रमदान कर सड़क के गड्ढे भरने की पहल करनी चाहिए।
अगली सुबह ही शुरू हुआ मरम्मत का काम
भाजपा संगठन महामंत्री की नाराजगी का असर अगले ही दिन नजर आया। बताया गया कि संबंधित सड़क पर गड्ढों को भरने और मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया। इससे स्थानीय लोगों में भी चर्चा है कि जिस सड़क की बदहाली लंबे समय से परेशानी का कारण बनी हुई थी, वहां एक वीआईपी वाहन के फंसने के बाद अचानक प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया।
आम जनता रोज झेलती है परेशानी
इस पूरे घटनाक्रम ने सड़क निर्माण और रखरखाव व्यवस्था को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आम नागरिकों की गाड़ियां इन गड्ढों में रोज फंसती हैं। दोपहिया वाहन चालक गिरकर घायल होते हैं और बारिश के दौरान सड़क पर पानी भर जाने से गड्ढों का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है। कई बार यही गड्ढे गंभीर सड़क हादसों का कारण बनते हैं।
आम लोगों का सवाल है कि जब किसी नेता या मंत्री की गाड़ी गड्ढे में फंसती है तो अधिकारियों की नींद तुरंत खुल जाती है, लेकिन आम नागरिकों की शिकायतों और रोजाना होने वाली परेशानियों पर कार्रवाई के लिए इतनी
तत्परता क्यों नहीं दिखाई जाती?
बारिश का हवाला देकर कब तक टलेगी मरम्मत?
बारिश के मौसम में सड़कों की स्थिति खराब होना कोई नई बात नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि बारिश के दौरान भी यातायात के लिहाज से महत्वपूर्ण सड़कों के गड्ढों को अस्थायी रूप से भरने और सुरक्षित बनाने की व्यवस्था क्यों नहीं की जाती। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई स्थानों पर मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति होती है और बारिश का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की जाती है।
हालांकि, सड़क निर्माण, ठेकेदारों और अधिकारियों पर लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बावजूद इसके, पवन सिंह की गाड़ी के गड्ढे में फंसने की घटना ने ‘आम आदमी की सड़क बनाम वीआईपी की सड़क’ वाली बहस को जरूर हवा दे दी है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि सीतापुर क्षेत्र की सड़क की मरम्मत महज गड्ढे भरने तक सीमित रहती है या सड़क की गुणवत्ता और स्थायी रखरखाव को लेकर भी जिम्मेदार विभाग ठोस कार्रवाई करता है।
