जब बाबा नीम करौली ने पूरी खत्म होने के बाद भी भक्तों को कराया भोजन, आज भी सुनाई जाती है उनकी दिव्य लीला
कैंची धाम।
बाबा नीम करौली महाराज का जीवन अपने आप में भक्ति, सेवा और करुणा का संदेश माना जाता है। उनके जीवन से जुड़ी अनेक कथाएं आज भी भक्तों के बीच श्रद्धा के साथ सुनाई जाती हैं। इन्हीं में से एक कथा है “पूरी वाली दिव्य कथा”, जिसमें बाबा की सहजता और भक्तों के प्रति उनके प्रेम की झलक दिखाई देती है।
भक्तों के बीच प्रचलित कथा के अनुसार, एक अवसर पर बाबा नीम करौली महाराज के आश्रम में बड़ी संख्या में लोग भोजन के लिए पहुंचे। आश्रम में भोजन की व्यवस्था की जा रही थी और भक्तों के लिए पूरियां बनाई जा रही थीं। देखते ही देखते लोगों की संख्या उम्मीद से कहीं अधिक हो गई। सेवकों को चिंता होने लगी कि उपलब्ध भोजन सभी लोगों के लिए पर्याप्त नहीं होगा।
बताया जाता है कि जब यह बात बाबा के सामने पहुंची तो उन्होंने बिल्कुल सहज भाव से कहा कि किसी को भोजन से वंचित मत करना। बाबा के लिए भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि सेवा और प्रसाद का माध्यम था।
सेवक पूरियां बांटते रहे। लोगों की भीड़ लगातार बढ़ती रही, लेकिन भक्तों की मान्यता है कि भोजन खत्म होने के बजाय सभी को प्रसाद मिलता गया। इस घटना को बाबा के भक्त उनकी दिव्य कृपा और अन्नपूर्णा स्वरूप सेवा भावना से जोड़कर देखते हैं।
कथा में सबसे भावुक प्रसंग तब बताया जाता है, जब भोजन समाप्त होने की आशंका के बावजूद बाबा बिल्कुल निश्चिंत दिखाई दिए। उनके लिए चिंता का विषय भोजन की मात्रा नहीं, बल्कि यह था कि कोई भूखा न लौटे।
बाबा की सीख—पहले सेवा, बाकी सब अपने आप
नीम करौली बाबा के जीवन से जुड़ी कथाओं में बार-बार सेवा, प्रेम और जरूरतमंदों को भोजन कराने का संदेश मिलता है। उनके भक्त मानते हैं कि बाबा का सबसे बड़ा चमत्कार किसी असाधारण घटना में नहीं, बल्कि दूसरों के दुख को अपना समझने और जरूरतमंद की सेवा करने में था।
आज भी कैंची धाम पहुंचने वाले श्रद्धालु बाबा को याद करते हुए भोजन, प्रसाद और सेवा को विशेष महत्व देते हैं। “पूरी वाली कथा” भी इसी भावना को सामने लाती है कि जहां सच्ची श्रद्धा और सेवा का भाव होता है, वहां भक्तों को बाबा की कृपा का अनुभव होता है।
भक्तों की आस्था में बाबा नीम करौली आज भी जीवित हैं—उनका संदेश सरल है: प्रेम करो, सेवा करो और किसी भूखे को भोजन से वंचित मत करो।
