बाबा के सामने बैठते ही बदल गया मन — एक भक्त का संस्मरण
कैंची धाम।
कहा जाता है कि एक भक्त किसी निजी परेशानी से बेहद व्याकुल होकर बाबा नीब करौरी महाराज के पास पहुंचे। मन में अनेक सवाल थे और वह बाबा से अपनी समस्या बताकर समाधान मांगना चाहते थे। बाबा उस समय भक्तों के बीच बैठे थे।
भक्त कुछ कह पाते, उससे पहले बाबा ने उनकी ओर देखा और मुस्कुराते हुए कहा—“तुम चिंता क्यों करते हो?”
भक्त के अनुसार यह सुनकर वह भीतर तक हिल गए, क्योंकि उन्होंने अपनी परेशानी बाबा को बताई ही नहीं थी। वे बाबा के सामने चुपचाप बैठे रहे। बाबा ने ज्यादा बातचीत नहीं की। कुछ देर बाद उन्होंने भोजन करने और प्रसाद लेने के लिए कहा।
भक्त का कहना था कि समस्या उसी दिन खत्म नहीं हुई, लेकिन बाबा के पास से लौटने के बाद उसके प्रति उनका दृष्टिकोण बदल गया। जिस बात को लेकर वे कई दिनों से घबराए हुए थे, उसे लेकर मन में एक अजीब-सी शांति आ गई। उन्हें लगा जैसे किसी ने भीतर से कह दिया हो—“सब ठीक होगा, तुम अपना काम करते रहो।”
बाद में परिस्थितियां धीरे-धीरे सुधरीं। भक्त ने इस पूरे अनुभव को बाबा की कृपा माना।
भक्तों के बीच बाबा के ऐसे संस्मरणों का मूल भाव यही है कि बाबा हमेशा बड़ी-बड़ी बातें नहीं करते थे। कभी एक नजर, कभी दो शब्द और कभी प्रसाद के माध्यम से ही भक्त को भीतर से मजबूत कर देते थे।
“बाबा के सानिध्य में समस्या हमेशा तुरंत नहीं बदलती थी, लेकिन भक्त का मन बदल जाता था—और वही बदलाव उसके लिए नई शक्ति बन जाता था।”
