बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की तत्परता से 16 हजार से अधिक लोगों का बचाव
प्रदेश के 571 गांवों में 22 हजार से अधिक लोग प्रभावित, 173 राहत शिविरों में 17,540 लोगों को मिला आश्रय
रायपुर।
प्रदेश में अतिवृष्टि एवं बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार राज्य शासन और जिला प्रशासन द्वारा व्यापक स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ तथा जिला प्रशासन की संयुक्त टीमों ने कठिन परिस्थितियों के बीच अब तक 16,074 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। बस्तर एवं बीजापुर जिलों के दुर्गम क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हेलीकॉप्टरों की भी मदद ली गई।
27 सितम्बर की स्थिति में प्रदेश के 571 गांवों के 22,377 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में कुल 173 राहत शिविर स्थापित किए गए, जिनमें 17,540 लोगों को आश्रय दिया गया। राहत शिविरों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य परीक्षण, दवाइयों सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की गई है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहा है और आवश्यकता के अनुसार राहत शिविरों का संचालन जारी है।
क्षतिग्रस्त मकानों और संपत्तियों का सर्वे, पात्र परिवारों को मिलेगी आर्थिक सहायता
बाढ़ के कारण प्रदेश में 199 मकान पूर्ण रूप से तथा 1,155 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। मकानों एवं अन्य संपत्तियों को हुई क्षति का राजस्व अमले द्वारा सर्वेक्षण और आकलन किया जा रहा है। पात्र प्रभावित परिवारों को राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 (आरबीसी 6-4) के प्रावधानों के अनुसार शीघ्र आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा रही है।
आपदा के कारण 8 जनहानि तथा 172 पशुहानि की सूचना प्राप्त हुई है। संबंधित जिला प्रशासन को प्रत्येक प्रकरण में नियमानुसार राहत राशि प्रदान करने के साथ प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
हर प्रभावित व्यक्ति की सुरक्षा और समयबद्ध राहत सर्वोच्च प्राथमिकता
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार राज्य शासन द्वारा बाढ़ की स्थिति तथा राहत एवं बचाव कार्यों की निरंतर समीक्षा की जा रही है। प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने, राहत शिविरों में भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सहित सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने और क्षति का शीघ्र आकलन कर पात्र परिवारों को समयबद्ध सहायता उपलब्ध कराने की है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और जिला प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार सक्रिय हैं।
