कोर्ट में समय पर जवाब पेश नहीं करना पड़ा भारी, कांकेर CMHO निलंबित
डॉ. रामचन्द्र ठाकुर पर शासन ने की कार्रवाई, न्यायालय ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर ₹3 हजार जमा करने के दिए थे निर्देश
रायपुर।
न्यायालयीन प्रकरण में निर्धारित समय-सीमा के भीतर जवाब प्रस्तुत नहीं करने और शासकीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने के मामले में राज्य सरकार ने कांकेर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. रामचन्द्र ठाकुर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 27 सितंबर 2026 को इसका आदेश जारी किया।
मामला उच्च न्यायालय बिलासपुर में चल रहे WPS क्रमांक 3865/2025, डॉ. लखन जूरी विरुद्ध छत्तीसगढ़ शासन से संबंधित है। शासन के आदेश के अनुसार 13 अगस्त 2026 को जारी आदेश के तहत इस न्यायालयीन प्रकरण में डॉ. लखन जूरी की ओर से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, कांकेर को प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया था।
महाधिवक्ता कार्यालय, उच्च न्यायालय बिलासपुर के पत्रों के आधार पर विभाग ने 16 सितंबर 2026 को डॉ. ठाकुर को 25 सितंबर तक न्यायालयीन प्रकरण में जवाबदावा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद निर्धारित समय-सीमा में जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया।
कोर्ट ने मांगा था व्यक्तिगत जवाब
आदेश में उल्लेख है कि निर्धारित समय पर जवाबदावा प्रस्तुत नहीं किए जाने की स्थिति में सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को उच्च न्यायालय के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर ₹3,000 जमा करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद कांकेर CMHO की ओर से निर्धारित समय-सीमा में जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया।
शासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा है कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जैसे जिम्मेदार पद पर रहते हुए संवेदनशील न्यायालयीन प्रकरण में समय पर कार्रवाई नहीं करना गंभीर लापरवाही, कर्तव्य के प्रति उदासीनता और शासकीय दायित्वों के समुचित निर्वहन में विफलता को दर्शाता है। इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 का स्पष्ट उल्लंघन भी माना गया है।
तत्काल प्रभाव से निलंबन
राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए डॉ. रामचन्द्र ठाकुर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय संभागीय संयुक्त संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, संभाग-बस्तर निर्धारित किया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि वे सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।
निलंबन अवधि के दौरान डॉ. ठाकुर को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। राज्यपाल के नाम से तथा आदेशानुसार लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अपर सचिव दिव्या वैष्णव ने यह आदेश जारी किया है।
