दक्षिण भारत के एक गांव में बाबा नीब करौरी की ऐसी लीला, जिसे देखकर ग्रामीण रह गए स्तब्ध
विशेष आध्यात्मिक प्रसंग | ‘पारस स्पर्श’ में वर्णित घटना
Raipur.
एक छोटे से गांव में बाबा नीब करौरी महाराज से जुड़ा एक ऐसा प्रसंग सामने आता है, जिसे उनके भक्त आज भी उनकी दिव्य कृपा और करुणा के उदाहरण के रूप में स्मरण करते हैं। ‘पारस स्पर्श’ में वर्णित इस प्रसंग में महाराजजी की उपस्थिति और उनके व्यवहार से जुड़ी ऐसी घटना का उल्लेख है, जिसने वहां मौजूद लोगों के मन पर गहरा प्रभाव छोड़ा।
बाबा नीब करौरी महाराज की विशेषता यही थी कि वे बाहरी आडंबर से दूर रहते हुए सामान्य लोगों के बीच सहज भाव से रहते थे। उनके लिए किसी व्यक्ति की जाति, भाषा, क्षेत्र या आर्थिक स्थिति महत्वपूर्ण नहीं थी। भक्तों के संस्मरणों में बार-बार यह भाव सामने आता है कि महाराजजी जहां भी गए, वहां लोगों ने उनके भीतर करुणा, सेवा और ईश्वर-स्मरण की प्रेरणा अनुभव की।
दक्षिण भारत के इस गांव से जुड़ी घटना भी इसी भावभूमि में सामने आती है। स्थानीय परिस्थितियों के बीच महाराजजी की कृपा से जुड़ा यह प्रसंग धीरे-धीरे लोगों के लिए श्रद्धा का विषय बन गया। घटना में बाबा का व्यवहार सामान्य दिखाई देता है, लेकिन उसके परिणाम ने उपस्थित लोगों को भीतर तक प्रभावित किया।
भक्तों के अनुसार, महाराजजी की लीला को केवल चमत्कार के रूप में देखना उनके संदेश को छोटा करना होगा। उनका मूल संदेश प्रेम, सेवा और भगवान के स्मरण का था। वे अपने भक्तों को बार-बार समझाते थे कि सच्ची साधना केवल पूजा-पाठ में नहीं, बल्कि जरूरतमंद की सेवा और हर प्राणी के प्रति प्रेम में है।
‘पारस स्पर्श’ में दर्ज यह प्रसंग इसी कारण विशेष महत्व रखता है। घटना चाहे दक्षिण भारत के एक छोटे से गांव की हो, लेकिन इससे जुड़ा संदेश सार्वभौमिक है—जहां करुणा, सेवा और ईश्वर का स्मरण है, वहीं महाराजजी की कृपा का अनुभव किया जा सकता है।
महाराजजी के भक्त इस प्रसंग को आज भी श्रद्धा से याद करते हैं और मानते हैं कि बाबा का जीवन स्वयं एक संदेश था—सबसे प्रेम करो, सबकी सेवा करो और भगवान को याद रखो।
