ड्रिल मशीन के दम पर विवेक ने लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी, मेहनत से संवारे परिवार के सपने
नौ साल पहले खुद खरीदी मशीन, खुद सीखा चलाना ; आज अपने दम पर ले रहे ठेके, गांव में बनाया शानदार घर, अब रायपुर में आशियाना बनाने की तैयारी
रायपुर।
कहते हैं कि अगर इंसान में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो सीमित संसाधन भी उसकी तरक्की का रास्ता नहीं रोक सकते। छत्तीसगढ़ के ग्राम धनेली निवासी विवेक विश्वकर्मा की कहानी इसकी मिसाल है। उन्होंने न तो बड़े कारोबार का सहारा लिया और न ही किसी के भरोसे अपनी जिंदगी की दिशा तय की। एक ड्रिल मशीन खरीदी, उसे चलाना सीखा और मेहनत को अपनी ताकत बनाकर खुद के साथ पूरे परिवार की जिंदगी संवारने में जुट गए। आज करीब नौ साल की मेहनत के बाद विकास अपने पैरों पर खड़े हैं और परिवार के छोटे-बड़े सपनों को पूरा कर रहे हैं।
छोटी शुरुआत, बड़ा हौसला
विवेक बताते हैं कि करीब नौ साल पहले उन्होंने कुछ पैसे जोड़कर एक ड्रिल मशीन खरीदी थी। मशीन खरीदना ही उनके लिए काफी नहीं था, बल्कि उसे चलाना सीखना और काम हासिल करना भी बड़ी चुनौती थी। उन्होंने हार मानने के बजाय खुद मशीन चलाना सीखा। इसके बाद निर्माण कंपनियों और ठेकेदारों के पास जाकर काम मांगना शुरू किया।
शुरुआत में उन्हें जितना काम मिलता, उसी से अपनी आजीविका चलाते और आगे बढ़ने की कोशिश करते। धीरे-धीरे उनके काम का दायरा बढ़ने लगा। मेहनत, लगन और अनुभव के साथ उन्होंने काम करने का तरीका सीखा और अपनी पहचान बनाई। एक समय जो विवेक ठेकेदारों से काम मांगने जाते थे, आज वे खुद काम के ठेके लेने लगे हैं।

मेहनत बनी परिवार की खुशहाली का आधार
ड्रिल मशीन के सहारे विवेक सुबह से शाम तक मेहनत करते हैं। उनके लिए यह मशीन सिर्फ कमाई का साधन नहीं, बल्कि परिवार की खुशहाली और आत्मनिर्भरता का आधार है। लगातार काम करते हुए उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की और परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य के सपनों को भी आकार देना शुरू किया।
विवेक की कमाई से परिवार की जिंदगी में खुशहाली आई है। बच्चों की उम्मीदें हों, माता-पिता की जरूरतें हों या अपने परिवार को बेहतर सुविधाएं देने का सपना—वह अपनी मेहनत के बूते इन्हें पूरा करने में जुटे हैं। उनकी कहानी बताती है कि काम छोटा या बड़ा नहीं होता, बल्कि उसे करने का जज्बा और ईमानदारी इंसान को आगे बढ़ाती है।
गांव में बनाया शानदार घर, अब राजधानी में आशियाने का सपना
लगातार मेहनत और बचत के दम पर विवेक ने अपने पैतृक गांव धनेली में एक शानदार घर बनाया है। यह घर उनके लिए सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष, पसीने और मेहनत से हासिल की गई उपलब्धियों का प्रतीक है। कभी एक मशीन के सहारे काम शुरू करने वाले विवेक ने धीरे-धीरे अपने परिवार को बेहतर जीवन देने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
अब उनका अगला सपना राजधानी रायपुर में अपना घर बनाने का है। वे चाहते हैं कि उनकी मेहनत का सफर आगे भी जारी रहे और परिवार को भविष्य में और बेहतर सुविधाएं मिलें।
दूसरों के लिए भी प्रेरणा है विकास की कहानी
विवेक की जिंदगी का सफर उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो रोजगार की तलाश में हैं या अपना काम शुरू करना चाहते हैं। उनकी कहानी सिखाती है कि आत्मनिर्भर बनने के लिए हमेशा बड़े निवेश या बड़े अवसरों का इंतजार करना जरूरी नहीं है। सीमित संसाधनों से भी शुरुआत की जा सकती है, बशर्ते सीखने की इच्छा, मेहनत करने का हौसला और आगे बढ़ने का संकल्प हो।
धनेली के विवेक ने अपनी मेहनत से साबित किया है कि इंसान अगर ठान ले, तो वह अपने विकास का रास्ता खुद बना सकता है। ड्रिल मशीन से शुरू हुआ उनका सफर आज परिवार की खुशहाली और नए सपनों की ओर बढ़ रहा है। अब रायपुर में अपना घर बनाने का सपना भी इसी मेहनत की अगली मंजिल है।
