स्कूलों के बाद अब कॉलेजों के विलय की चर्चा, उच्च शिक्षा विभाग ने मांगी जानकारी
बेमेतरा जिले के ठेलका, बोरतरा और देवरबीजा कॉलेजों पर नजर; ठेलका कॉलेज में महज 56 विद्यार्थी होने से उठे सवाल
बेमेतरा।
प्रदेश में स्कूलों के युक्तियुक्तकरण के बाद अब कॉलेजों के विलय की चर्चा तेज हो गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने बेमेतरा जिले के तीन कॉलेजों—ठेलका, बोरतरा और देवरबीजा—से संबंधित जानकारी मांगी है। विभाग की इस पहल के बाद इन कॉलेजों के भविष्य को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। खासकर ठेलका कॉलेज में विद्यार्थियों की संख्या महज 56 होने की जानकारी सामने आने के बाद कम छात्र संख्या वाले कॉलेजों के संचालन और संसाधनों के उपयोग को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
कम छात्र संख्या बनी चिंता का विषय
जानकारी के अनुसार, उच्च शिक्षा विभाग जिले के तीन कॉलेजों की स्थिति का आकलन करने के लिए जरूरी विवरण जुटा रहा है। ठेलका कॉलेज में केवल 56 विद्यार्थियों का नामांकन होने की बात सामने आई है। ऐसे में कॉलेज में उपलब्ध शिक्षकों, कर्मचारियों, भवन और अन्य संसाधनों के उपयोग के साथ विद्यार्थियों को मिलने वाली शैक्षणिक सुविधाओं का आकलन महत्वपूर्ण हो गया है।
हालांकि, केवल कम छात्र संख्या के आधार पर किसी कॉलेज के विलय का निर्णय लिया जाएगा या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। विभाग द्वारा जानकारी मांगे जाने को संभावित युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया से जोड़कर देखा जा रहा है।
ग्रामीण विद्यार्थियों की बढ़ सकती है परेशानी
यदि भविष्य में कॉलेजों के विलय का निर्णय लिया जाता है, तो इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों पर पड़ सकता है। स्थानीय कॉलेजों के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने गांव और आसपास के क्षेत्र में ही उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलता है। कॉलेज दूर होने पर विद्यार्थियों को आने-जाने में अतिरिक्त समय और खर्च उठाना पड़ सकता है। इसका असर विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों और छात्राओं की पढ़ाई पर पड़ने की आशंका है।
विभाग के निर्णय पर टिकी नजरें
अब सबकी नजर उच्च शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर है। ठेलका, बोरतरा और देवरबीजा कॉलेजों से मांगी गई जानकारी के आधार पर विभाग क्या निर्णय लेता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल कॉलेजों के विलय को लेकर कोई अंतिम निर्णय होने की पुष्टि नहीं है। ऐसे में इन कॉलेजों के विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्थानीय लोगों की निगाहें विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं।
