तेंदूपत्ता संग्राहकों के जूता खरीदी टेंडर पर हाईकोर्ट की रोक, गड़बड़ी के आरोपों के बीच प्रक्रिया रद्द करने के निर्देश
बिलासपुर।
तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए जूते खरीदी की निविदा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के मामले में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश देते हुए संबंधित टेंडर को रद्द करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि सरकारी खरीद प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और निर्धारित नियमों के अनुरूप होनी चाहिए। यदि निविदा प्रक्रिया में समान अवसर और निष्पक्षता का पालन नहीं किया जाता, तो ऐसी प्रक्रिया न्यायिक समीक्षा के दायरे में आएगी।
मामला तेंदूपत्ता संग्राहकों को वितरित किए जाने वाले जूतों की खरीदी से जुड़ा है, जिसमें टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि निविदा की शर्तों और मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई, जिससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई और कुछ पक्षों को अनुचित लाभ मिलने की आशंका बनी।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने उपलब्ध रिकॉर्ड और पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए संबंधित टेंडर प्रक्रिया को रद्द करने का आदेश दिया। साथ ही स्पष्ट किया कि यदि दोबारा निविदा जारी की जाती है तो पूरी प्रक्रिया कानून और वित्तीय नियमों के अनुरूप, पारदर्शी एवं निष्पक्ष तरीके से अपनाई जाए।
इस फैसले को सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। विशेष रूप से तेंदूपत्ता संग्राहकों जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी खरीदी में गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धा और सार्वजनिक धन के उचित उपयोग पर अदालत ने अप्रत्यक्ष रूप से जोर दिया है।
मुख्य बिंदु
तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए जूता खरीदी टेंडर पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला।
निविदा प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोपों पर अदालत ने टेंडर रद्द करने के निर्देश दिए।
भविष्य में नई निविदा जारी होने पर पारदर्शी और नियमसम्मत प्रक्रिया अपनाने के निर्देश।
सरकारी खरीद में निष्पक्षता और समान अवसर सुनिश्चित करने पर हाईकोर्ट ने दिया जोर। :::**
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