तीसरी मंजिल पर मिला आशियाना, लेकिन मवेशियों का क्या? नकटी के विस्थापित परिवारों की नई चिंता

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रायपुर। नवा रायपुर के लिए विस्थापित किए गए नकटी गांव के परिवारों के सामने अब एक नई और गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। प्रशासन ने उन्हें बहुमंजिला ईडब्ल्यूएस फ्लैटों में रहने की व्यवस्था तो कर दी, लेकिन वर्षों से उनके साथ रह रहे मवेशियों के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया है।
गुरुवार को नकटी गांव में तोड़फोड़ के बाद कई परिवारों को नवा रायपुर के जी सेक्टर स्थित तीन मंजिला फ्लैटों में शिफ्ट किया गया। प्रभावित परिवारों का कहना है कि ग्रामीण जीवन में गाय, बैल और बकरियां केवल पशु नहीं, बल्कि आजीविका और परिवार का हिस्सा हैं। ऐसे में तीसरी मंजिल पर बने फ्लैट में मवेशियों को रखना संभव नहीं है।
एक प्रभावित ग्रामीण ने कहा, “हम तो किसी तरह फ्लैट में रह लेंगे, लेकिन हमारी गाय कहां रहेगी? उसका घर तो प्रशासन ने तोड़ दिया।” कई परिवारों ने बताया कि उनके पशु खुले में रहने को मजबूर हैं और उनके चारे-पानी की भी व्यवस्था नहीं है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने लोगों के रहने की व्यवस्था तो कर दी, लेकिन पशुधन के लिए कोई वैकल्पिक स्थान या गोशाला उपलब्ध नहीं कराई। इससे उनकी आजीविका पर भी संकट खड़ा हो गया है।
विस्थापित परिवारों ने मांग की है कि सरकार उनके मवेशियों के लिए भी उचित व्यवस्था करे। उनका कहना है कि पुनर्वास केवल लोगों को फ्लैट देने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ग्रामीण परिवारों की जीवनशैली और उनकी आजीविका से जुड़े पहलुओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
नकटी गांव के विस्थापन के बीच यह सवाल अब प्रमुखता से उठ रहा है कि जब परिवारों के साथ उनका पशुधन भी प्रभावित हुआ है, तो पुनर्वास योजना में उनके लिए अलग व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
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