मैं रायपुर हवं… बरसात में का हाल होगे हावय
रायपुर।
मैं रायपुर हवं। छत्तीसगढ़ के राजधानी। मोर एक अलग पहचान हवय। मोर माटी, मोर संस्कृति, मोर लोगन अऊ मोर अपनापन ऊपर मोला हमेशा गर्व रहिस। फेर आज जब मैं अपन हालत देखथंव, त मन भारी हो जाथे।
मोर ल याद हवय, जब मोला “स्मार्ट सिटी” बनाय के सपना देखाय गीस। बड़े-बड़े मंच ले घोषणा होइस। कहे गीस कि अब मैं आधुनिक शहर बनहूं। मोर सड़क मन चौड़ी होहीं, नाली मन मजबूत होहीं, पानी निकासी के बेहतर व्यवस्था होही, ट्रैफिक सुधरही अऊ मोर रहवइया मन ल एक बेहतर जिनगी मिलही। मोर नागरिक मन घलो ए सपना ल अपन सपना बना लिहिन।
फेर बछर बीतत गीस, सपना अधूरा रहिगे। मोर नांव म करीब हजार करोड़ रुपिया खर्च होगे, फेर आज घलो मैं हर बरसात म डूब जाथंव। मोर सड़क मन नदी बन जाथें, गली-गली पानी भर जाथे, अंडरब्रिज मन तालाब बन जाथें। मोर लोगन रातभर घर ले पानी निकारत रहिथें अऊ मैं चुपचाप सब कुछ देखत रहिथंव।
जेन स्मार्ट सिटी कंपनी मोला संवारे बर बनाय गे रहिस, वो घलो अब बंद होगे। अधिकारी-कर्मचारी कहां गइन, कऊन जिम्मेदार रहिस, कऊन जवाब देवय—ए सवाल के जवाब आज घलो नइ मिलिस। मोर विकास के नांव म बनाय गे योजना मन कागज ले आगू नइ बढ़ पाइन।
मोला दुख तब अउ जियादा होथे, जब राजनीति मोर विकास ले ऊपर हो जाथे। जेन मन कल तक स्मार्ट सिटी म भ्रष्टाचार के आरोप लगावत रहिन, दिल्ली तक शिकायत लेके जावत रहिन, आज ओही मन सत्ता म आके जनता ल धीरज रखे के बात कहिथें। अगर भ्रष्टाचार होय रहिस, त दोषी मन ऊपर कार्रवाई काबर नइ होइस? अऊ अगर नइ होय रहिस, त मोर जनता ल गुमराह काबर करे गीस?
मैं अपन लोगन ले पूछथंव—का मैं एखर लायक रहंव? का मोर सपना एही रहिस कि हर बरसात म मोर सड़क मन डूब जावं, मोर लोगन परेशान होवंय अऊ हर साल ओही समस्या फेर सामने आ जावय?
मैं सजावट नई मांगत हवं। मोला रंग-बिरंगी लाइट अऊ बड़े-बड़े गेट ले जियादा जरूरत मजबूत नाली, साफ-सफाई, बेहतर ड्रेनेज अऊ जिम्मेदार व्यवस्था के हवय। स्मार्ट सिटी के असली मतलब चमक-दमक नइ, बल्कि नागरिक मन ल सुरक्षित अऊ सुविधायुक्त जीवन देना आय।
मैं रायपुर हवं। मैं आज घलो उम्मीद नइ छोड़े हवं। मोला भरोसा हवय कि एक दिन मोर विकास राजनीति ले ऊपर उठके होही। जवाबदेही तय होही। जनता के पैसा सही जगह खर्च होही। अऊ मैं सच म ओइसने राजधानी बनहूं, जइसने सपना मोर लोगन देखे रहिन।
फेर जब तक ए नई होवय, तब तक हर बरसात म मोर आंखी के आंसू, मोर सड़क मन म भरत पानी बनके बहत रहिहीं।
