पंडवानी की अमर स्वर-सम्राज्ञी तीजन बाई नहीं रहीं, शाम 4 बजे राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
रायपुर/भिलाई।
छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को देश-दुनिया में नई पहचान दिलाने वाली पद्म सम्मान से अलंकृत प्रसिद्ध पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई का बीती रात निधन हो गया। उनके निधन से पूरे छत्तीसगढ़ में शोक की लहर है। मुख्यमंत्री, राज्यपाल, मंत्रिपरिषद के सदस्यों सहित विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों की हस्तियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। उनका अंतिम संस्कार आज शाम 4 बजे भिलाई में राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।
तीजन बाई का जाना केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि भारतीय लोककला जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपनी सशक्त आवाज, दमदार अभिनय और अनूठी प्रस्तुति शैली से पंडवानी जैसी लोककला को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। महाभारत की कथाओं को जीवंत अभिनय, संवाद और गायन के साथ प्रस्तुत करने की उनकी शैली ने दुनिया भर के दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
छत्तीसगढ़ के एक साधारण ग्रामीण परिवेश से निकलकर तीजन बाई ने तमाम सामाजिक चुनौतियों का सामना किया और अपनी प्रतिभा के दम पर लोककला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने देश के लगभग हर प्रमुख सांस्कृतिक मंच पर प्रस्तुति दी, वहीं यूरोप, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, रूस, ऑस्ट्रेलिया समेत अनेक देशों में भी पंडवानी का प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया।
तीजन बाई ने पंडवानी की ‘कापालिक शैली’ को लोकप्रिय बनाया। इस शैली में वे तंबूरा हाथ में लेकर अभिनय, संवाद, भाव-भंगिमा और गायन के अद्भुत समन्वय से महाभारत के पात्रों को सजीव कर देती थीं। उनकी प्रस्तुतियां केवल लोकगायन नहीं, बल्कि जीवंत रंगमंच का अनुभव कराती थीं।
उनके असाधारण योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए।
तीजन बाई ने अपने जीवन का अधिकांश समय लोककला के संरक्षण और नई पीढ़ी को पंडवानी से जोड़ने में समर्पित किया। उनके शिष्यों की लंबी परंपरा आज भी इस लोककला को आगे बढ़ा रही है। उनके निधन से लोकसंस्कृति का एक ऐसा युग समाप्त हो गया जिसने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर स्थापित किया।
आज शाम भिलाई में राजकीय सम्मान के साथ होने वाले अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में कलाकार, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और आम नागरिक उन्हें अंतिम विदाई देंगे। तीजन बाई की बुलंद आवाज, उनकी अद्वितीय प्रस्तुति और लोककला के प्रति समर्पण हमेशा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता है।
