सामूहिक नकल मामले में बड़ी कार्रवाई: बिलासपुर और महासमुंद के 5 कर्मचारी दोषी, चपरासी भी शामिल
रायपुर।
छत्तीसगढ़ में सामूहिक नकल के मामलों पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। बिलासपुर और महासमुंद जिलों में सामने आए सामूहिक नकल प्रकरण में चपरासी समेत कुल पांच कर्मचारियों को दोषी पाया गया है। इस संबंध में शिक्षा सचिव ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में दायर शपथपत्र में जानकारी देते हुए बताया कि सभी दोषियों के खिलाफ विभागीय चार्जशीट जारी कर दी गई है और नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है।
शपथपत्र के अनुसार, दोनों जिलों में परीक्षा के दौरान सामूहिक नकल की शिकायतों की जांच कराई गई थी। जांच में संबंधित कर्मचारियों की लापरवाही और कर्तव्य में गंभीर चूक सामने आने के बाद उन्हें दोषी ठहराया गया। दोषियों में एक चपरासी भी शामिल है, जिस पर परीक्षा संचालन में नियमों का उल्लंघन करने और नकल को रोकने में विफल रहने के आरोप सिद्ध हुए हैं।
शिक्षा विभाग ने हाईकोर्ट को बताया कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सभी पांच आरोपियों को चार्जशीट जारी कर जवाब मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद सेवा नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि बोर्ड और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं की पारदर्शिता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। परीक्षा केंद्रों पर लापरवाही या नकल को बढ़ावा देने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।
इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान शिक्षा विभाग ने यह भी भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए परीक्षा केंद्रों की निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
इस कार्रवाई को प्रदेश में परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और नकलमुक्त बनाने की दिशा में सरकार का बड़ा कदम माना जा रहा है।
