सरकारी बिजली कनेक्शनों में प्री-पेड व्यवस्था लागू, नगरीय निकायों को कनेक्शन कटने से बचाने की सख्त हिदायत
नवा रायपुर।
छत्तीसगढ़ में सरकारी बिजली कनेक्शनों को लेकर नगरीय निकायों की व्यवस्था अब प्री-पेड मॉडल पर होगी। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने 11 अगस्त 2026 को सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को निर्देश जारी कर सरकारी विद्युत कनेक्शनों में 1 अगस्त से शुरू की गई प्री-पेड बिलिंग व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जरूरी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।
पहले चरण में बड़े सरकारी कार्यालय दायरे में
विभागीय निर्देश के मुताबिक पहले चरण में विकासखंड एवं उससे ऊपर के स्तर के सभी शासकीय कार्यालयों के बिजली कनेक्शन स्मार्ट मीटर के जरिए प्री-पेड बिलिंग व्यवस्था में शामिल किए जाएंगे। इसके बाद विकासखंड स्तर से नीचे के कार्यालयों को भी इस प्रणाली में शामिल करने का प्रस्ताव है।
हर निकाय में होगा प्री-पेड नोडल अधिकारी
नई व्यवस्था के संचालन, भुगतान और निगरानी के लिए प्रत्येक नगरीय निकाय को एक प्री-पेड नोडल अधिकारी नामांकित करना होगा। नगर निगम में यह जिम्मेदारी आयुक्त अथवा उनके निर्देश पर जोन आयुक्त, उपायुक्त या कार्यपालन अभियंता को दी जा सकेगी, जबकि नगर पालिका और नगर पंचायत स्तर पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी जिम्मेदार होंगे। अधिकारी का नाम, पदनाम, मोबाइल नंबर और ई-मेल की जानकारी संबंधित वितरण कंपनी यानी CSPDCL को उपलब्ध करानी होगी।
30 जून तक के बकाये की चार तिमाहियों में अदायगी
सरकार ने 30 जून 2026 तक लंबित बिजली बकाये के भुगतान के लिए भी व्यवस्था तय की है। पुराने बकाये का भुगतान आगामी चार तिमाहियों में निर्धारित समान किस्तों में किया जाएगा। निकायों को पहले अपने लंबित बकाये का सत्यापन कर तय समयसीमा में भुगतान सुनिश्चित करना होगा।
अग्रिम रिचार्ज रखना होगा, तभी नहीं कटेगी बिजली
प्री-पेड व्यवस्था में बिजली आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए प्रत्येक नगरीय निकाय को अगली तिमाही की अनुमानित बिजली खपत के आधार पर रिचार्ज राशि अग्रिम रूप से उपलब्ध करानी होगी। विभाग ने साफ किया है कि भुगतान या रिचार्ज में देरी के कारण बिजली कनेक्शन कटने की स्थिति नहीं बननी चाहिए।
पेयजल से स्ट्रीट लाइट तक सेवाओं पर नजर
सरकार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि प्री-पेड व्यवस्था के कारण नगरीय निकायों की जरूरी सेवाएं प्रभावित न हों। निर्देश में विशेष रूप से पेयजल आपूर्ति, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट, स्वच्छता व्यवस्था समेत अन्य आवश्यक सेवाओं की बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होने देने की जिम्मेदारी निकायों पर डाली गई है।
RTGS, NEFT और IMPS से होगा भुगतान
प्री-पेड रिचार्ज और पुराने बकाये का भुगतान ऊर्जा विभाग/CSPDCL द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार RTGS, NEFT या IMPS के माध्यम से समयबद्ध तरीके से करना होगा। भुगतान के बाद संबंधित विवरण वितरण कंपनी को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि राशि का सही समायोजन हो सके।
हर माह देनी होगी अनुपालन रिपोर्ट
नगरीय निकायों को की गई कार्रवाई की निकायवार अनुपालन रिपोर्ट निर्धारित प्रारूप में हर माह की 5 तारीख तक राज्य शहरी विकास अभिकरण की एनर्जी ऑडिट शाखा को भेजनी होगी। रिपोर्ट में कुल विद्युत कनेक्शन, प्री-पेड ग्रुप आईडी, नोडल अधिकारी, 30 जून की स्थिति में बकाया, भुगतान की गई राशि, आगामी तिमाही की रिचार्ज राशि और वर्तमान बैलेंस जैसी जानकारी देनी होगी।
लापरवाही हुई तो निकाय की तय होगी जिम्मेदारी
विभाग ने प्री-पेड व्यवस्था के क्रियान्वयन में किसी भी तरह की ढिलाई पर कड़ा रुख अपनाया है। निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि लापरवाही के कारण बिजली आपूर्ति बाधित होती है या नगरीय निकायों द्वारा संचालित आवश्यक सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तो संबंधित नगरीय निकाय की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
यानी अब बिजली बिल के बजाय बैलेंस प्रबंधन पर जोर
नई व्यवस्था में नगरीय निकायों के सामने चुनौती केवल पुराने बिजली बकाये के भुगतान की नहीं, बल्कि हर तिमाही पर्याप्त रिचार्ज राशि पहले से उपलब्ध रखने और बैलेंस की लगातार निगरानी करने की भी होगी। सरकार ने साफ कर दिया है कि शहरी सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने के लिए निकायों को प्री-पेड बिजली व्यवस्था का वित्तीय और तकनीकी प्रबंधन गंभीरता से करना होगा।
