महिला जनप्रतिनिधियों के ‘प्रॉक्सी’ पर रोक, पति-परिवार के सदस्य नहीं बन सकेंगे प्रतिनिधि

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नगरीय निकायों में अब महिला जनप्रतिनिधियों की जगह परिवार के सदस्यों के हस्तक्षेप पर लगेगी रोक


रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के नाम पर उनके पति या परिवार के अन्य सदस्यों के प्रतिनिधि अथवा समन्वयक के रूप में काम करने पर रोक लगा दी है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने 6 अगस्त 2026 को अधिसूचना जारी कर छत्तीसगढ़ नगरपालिका (लोकसभा सदस्य या राज्य विधानसभा के सदस्य या राज्य सभा के सदस्य द्वारा प्रतिनिधि के रूप में नाम निर्देशन हेतु अर्हताएं) नियम, 2022 में महत्वपूर्ण संशोधन किया है।
संशोधित नियम में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी नगरीय निकाय में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के पति, पुत्र, पुत्री, भाई, बहन अथवा किसी अन्य निकट पारिवारिक सदस्य या रिश्तेदार को उनके प्रॉक्सी प्रतिनिधि अथवा समन्वयक के रूप में नामित या नियुक्त नहीं किया जा सकेगा।
सरकार ने यह संशोधन छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम अधिनियम, 1956 और छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए किया है। अधिसूचना छत्तीसगढ़ राजपत्र (असाधारण) में 6 अगस्त 2026 को प्रकाशित की गई है।
नियम लागू कराने के निर्देश
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने अधिसूचना की जानकारी प्रदेश के सभी नगर निगम आयुक्तों तथा नगरपालिकाओं और नगर पंचायतों के मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को भेजी है। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को संशोधित प्रावधानों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
इस फैसले को नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों की स्वतंत्र भूमिका और अधिकारिता को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अब महिला जनप्रतिनिधि के स्थान पर उनके पति या अन्य करीबी रिश्तेदार के माध्यम से प्रतिनिधित्व किए जाने की व्यवस्था पर स्पष्ट कानूनी रोक रहेगी।

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