सेवा सुशासन के बहाने भाजपा का जिला और बूथ स्तर पर अभियान, 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा

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संभाग प्रभारियों से लेकर जिला और मंडल अध्यक्षों की तैयार होगी रिपोर्ट, मंत्री-सांसदों और विधायकों की सक्रियता भी रहेगी निगरानी में


रायपुर।

छत्तीसगढ़ में संगठन को और अधिक सक्रिय बनाने तथा सरकार के कामकाज को जनता तक पहुंचाने के लिए भाजपा अगले माह से जिला और बूथ स्तर पर विशेष अभियान शुरू करने जा रही है। ‘सेवा सुशासन’ के संदेश के साथ चलने वाला यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा। अभियान को लेकर संगठन की ओर से संभाग प्रभारियों, जिला अध्यक्षों, मंडल अध्यक्षों और अन्य पदाधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और उपलब्धियों को बूथ स्तर तक पहुंचाने के साथ संगठन की जमीनी सक्रियता को मजबूत करना है। भाजपा संगठन इस दौरान यह भी आकलन करेगा कि पार्टी के पदाधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में कितने सक्रिय हैं और संगठनात्मक गतिविधियों को किस तरह आगे बढ़ाया जा रहा है।
संभाग से बूथ तक तैयार होगी रिपोर्ट
अभियान के दौरान संभाग प्रभारियों से लेकर जिला अध्यक्ष और मंडल अध्यक्षों तक की सक्रियता की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। बूथ स्तर पर पार्टी के कार्यक्रमों, जनसंपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों की स्थिति की भी जानकारी जुटाई जाएगी। इससे पार्टी नेतृत्व को यह पता चल सकेगा कि संगठन की गतिविधियां जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी हैं।
मंत्री-सांसद और विधायक भी रहेंगे फोकस में
अभियान में केवल संगठन पदाधिकारियों की ही परीक्षा नहीं होगी, बल्कि मंत्री, सांसद और विधायकों की सक्रियता भी महत्वपूर्ण रहेगी। जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्रों में जनता और कार्यकर्ताओं के बीच अधिक सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि अभियान के जरिए संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर भी जोर दिया जाएगा।
बूथ को मजबूत करने पर जोर
भाजपा का फोकस इस अभियान के जरिए बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने पर रहेगा। पदाधिकारियों को नियमित जनसंपर्क, सरकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने और स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाला यह अभियान भाजपा के संगठनात्मक कामकाज के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अभियान पूरा होने के बाद तैयार होने वाली रिपोर्ट के आधार पर कमजोर क्षेत्रों की पहचान कर वहां संगठन को और मजबूत करने की रणनीति बनाई जा सकती है।

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