अफीम-गांजे की खेती पर सरकार की पैनी नजर, संदेह होते ही मौके पर पहुंच रहे अधिकारी
गिरदावरी में इस बार विशेष सतर्कता, राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त निगरानी; खेतों की स्थिति का मौके पर सत्यापन कर तैयार की जा रही रिपोर्ट
रायपुर।
प्रदेश में प्रतिबंधित मादक पदार्थों की खेती पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने निगरानी और सख्त कर दी है। खासकर अफीम और गांजे की खेती को लेकर राजस्व और कृषि विभाग इस बार गिरदावरी के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं। खेतों में फसल को लेकर किसी तरह का संदेह होने पर केवल कागजी रिकॉर्ड के आधार पर रिपोर्ट तैयार करने के बजाय संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का सत्यापन कर रहे हैं।
गिरदावरी के दौरान फसल के प्रकार, रकबे और खेत की स्थिति की जानकारी दर्ज की जा रही है। यदि किसी खेत में सामान्य फसल के बजाय प्रतिबंधित फसल होने की आशंका नजर आती है तो अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इससे प्रतिबंधित फसलों की खेती को शुरुआती स्तर पर ही चिन्हित करने में मदद मिलेगी।
बस्तर में 800 से अधिक पौधे मिले थे
प्रदेश में मादक पदार्थों की अवैध खेती को लेकर प्रशासन पहले से ही अलर्ट है। पिछले दिनों बस्तर क्षेत्र में 800 से अधिक गांजे के पौधे पकड़े जाने की कार्रवाई सामने आई थी। इसके बाद मैदानी अमले को भी गिरदावरी के दौरान संदिग्ध फसलों पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
सिर्फ गिरदावरी नहीं, मौके पर जांच पर जोर
इस बार व्यवस्था का फोकस केवल गिरदावरी के आंकड़े जुटाने तक सीमित नहीं है। राजस्व और कृषि अमला खेतों में जाकर फसल की स्थिति देखने के साथ आवश्यक जानकारी दर्ज कर रहा है। संदेह की स्थिति में वरिष्ठ अधिकारियों को भी इसकी सूचना दी जा रही है, ताकि आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को रिपोर्ट भेजी जा सके।
सरकार का मकसद स्पष्ट है कि गिरदावरी के दौरान प्रतिबंधित फसलों से जुड़ी किसी भी गतिविधि को नजरअंदाज न किया जाए। खेत की वास्तविक स्थिति और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी में अंतर मिलने पर भी उसका सत्यापन किया जा रहा है।
