बाबा के दरबार में पहुंचकर बदल गई जीवन की दिशा, हरि शर्मा ने महसूस की महाराज जी की अद्भुत कृपा
कैंची धाम।
बाबा नीब करौरी महाराज के भक्तों के लिए महाराज जी केवल एक संत नहीं, बल्कि प्रेम, सेवा और ईश्वर-स्मरण की जीवंत प्रेरणा थे। वृंदावन और कैंची धाम से जुड़े भक्तों की स्मृतियों में आज भी बाबा की सहज मुस्कान, करुणा और भक्तों के प्रति अपनापन जीवंत है। भक्त हरि शर्मा भी उन श्रद्धालुओं में रहे, जिन्होंने महाराज जी के सानिध्य को नजदीक से अनुभव किया।
हरि शर्मा की श्रद्धाभाव से जुड़ी स्मृतियों में बाबा का सबसे बड़ा आकर्षण उनका सरल और सहज व्यक्तित्व था। महाराज जी के आसपास रहने वाला व्यक्ति महसूस करता था कि बाबा बाहरी आडंबर से दूर रहकर सीधे मन और भाव को देखते हैं। उनके लिए भक्त की पहचान उसकी संपत्ति, पद या प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि उसके मन की सच्चाई और सेवा-भाव से होती थी।
बाबा के सानिध्य में आने वाले भक्तों को बार-बार एक ही संदेश मिलता था—दूसरों से प्रेम करो, जरूरतमंदों की सेवा करो और भगवान को याद रखो। यही संदेश बाबा की आध्यात्मिक साधना का आधार माना जाता है।
हरि शर्मा जैसे भक्तों के लिए बाबा की सबसे बड़ी लीला किसी चमत्कार से अधिक उनके भीतर पैदा होने वाला विश्वास था। बाबा के पास पहुंचने वाला व्यक्ति अपनी परेशानियां लेकर आता और कई बार बिना किसी लंबे उपदेश के ही मन में शांति लेकर लौटता। बाबा की नजर, उनका मौन और उनका स्नेह भक्तों के लिए अपने आप में संदेश बन जाता था।
वृंदावन में बाबा के आश्रम से जुड़ी पुरानी तस्वीरों में हरि शर्मा की उपस्थिति का उल्लेख मिलता है। उपलब्ध फोटो अभिलेखों में 1971 से 1973 के बीच की तस्वीर में उन्हें पहचाना गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि वे उस दौर के भक्त-परिवार और आश्रम के वातावरण से जुड़े हुए थे।
महाराज जी की दिव्य गाथा का सार यही है कि उन्होंने भक्तों को चमत्कारों के पीछे भागने के बजाय प्रेम और सेवा का रास्ता दिखाया। आज भी उनके भक्त मानते हैं कि बाबा का सच्चा आशीर्वाद उनके बताए रास्ते पर चलने में है।
“सबसे प्रेम करो, सबकी सेवा करो और भगवान को याद रखो”—महाराज जी का यही संदेश आज भी उनके भक्तों के हृदय में जीवित है
