बाबा नीब करौरी का पारस स्पर्श, जिसने बदल दी भक्त की जिंदगीभक्त के लिए बाबा का सान्निध्य केवल दर्शन नहीं, भीतर के अंधकार से प्रकाश की यात्रा था
वृंदावन। बाबा नीब करौरी महाराज के जीवन से जुड़े भक्त संस्मरणों में ऐसे अनेक प्रसंग मिलते हैं, जिन्हें भक्त आज भी उनके दिव्य सान्निध्य और कृपा का अनुभव मानते हैं। ‘पारस स्पर्श’ जैसे संस्मरणों में बाबा के व्यक्तित्व का यही पक्ष उभरकर सामने आता है—वे बाहर से साधारण दिखाई देते थे, लेकिन उनके सान्निध्य में बैठने वाले भक्त अपने भीतर एक अलग ही शांति और परिवर्तन महसूस करते थे।
एक भक्त लंबे समय से मानसिक उलझनों और जीवन की परेशानियों से घिरा हुआ था। परिस्थितियां ऐसी थीं कि उसे किसी रास्ते की समझ नहीं आ रही थी। मन में तरह-तरह के प्रश्न थे और भविष्य को लेकर चिंता बनी रहती थी। इसी बेचैनी में वह बाबा के पास पहुंचा। भक्त ने अपनी परेशानी बाबा को बताने की कोशिश की, लेकिन बाबा ने उसकी पूरी बात सुने बिना ही उसे शांत रहने का संकेत किया।
बाबा कुछ क्षण चुप रहे। फिर उनकी दृष्टि भक्त पर पड़ी। भक्तों के संस्मरणों में वर्णित ऐसे प्रसंगों में बाबा का मौन ही जैसे उत्तर बन जाता था। कहा जाता है कि बाबा ने भक्त को अपने पास बुलाया और प्रेमपूर्वक स्पर्श किया। उस क्षण भक्त के भीतर जैसे लंबे समय से जमा तनाव टूटने लगा। आंखों से आंसू निकल आए और मन हल्का हो गया।
बाबा ने उसे समझाया कि मनुष्य को हर परिस्थिति में भगवान का स्मरण करते हुए अपना कर्म करते रहना चाहिए। भविष्य की चिंता और बीते समय का बोझ मनुष्य को वर्तमान से दूर कर देता है। बाबा का संदेश सरल था—प्रेम करो, सेवा करो और भगवान को याद रखो।
भक्त के लिए वह क्षण केवल एक मुलाकात नहीं था। उसके भीतर विश्वास जागा कि कठिन परिस्थितियां स्थायी नहीं होतीं। बाबा के सान्निध्य ने उसे अपनी समस्याओं को नए दृष्टिकोण से देखने की प्रेरणा दी।
यही कारण है कि बाबा नीब करौरी महाराज से जुड़े भक्त अनुभवों में ‘स्पर्श’ का अर्थ केवल शारीरिक स्पर्श नहीं माना जाता। भक्तों की आस्था में यह वह आध्यात्मिक स्पर्श है, जो भय को विश्वास में, बेचैनी को शांति में और निराशा को आशा में बदल देता है।
बाबा की सबसे बड़ी विशेषता यही मानी जाती है कि उन्होंने बड़े-बड़े उपदेशों के बजाय प्रेम, सेवा और स्मरण को जीवन का आधार बनाया। उनके भक्तों के लिए आज भी बाबा की तस्वीर के सामने बैठना, उनका नाम लेना और जरूरतमंद की सेवा करना उसी दिव्य परंपरा का हिस्सा है।
वृंदावन और कैंची धाम से लेकर देश-दुनिया के अनेक हिस्सों तक बाबा के भक्त अपने अनुभवों में उनकी कृपा का स्मरण करते हैं। किसी के लिए वह संकट की घड़ी में मिला सहारा है, तो किसी के लिए जीवन की दिशा बदल देने वाला अनुभव।
बाबा की दिव्य गाथाओं का सार शायद यही है—जब मन सच्चे भाव से भगवान और गुरु की ओर मुड़ता है, तो भीतर का परिवर्तन ही सबसे बड़ा चमत्कार बन जाता है।
