कैंची धाम की दिव्य घटना : जब भंडारे में खत्म हो गया घी, बाबा ने कहा—नदी से पानी ले आओ
नैनीताल। कैंची धाम और बाबा नीब करौरी महाराज से जुड़े अनेक ऐसे प्रसंग भक्तों के बीच आज भी श्रद्धा के साथ सुनाए जाते हैं, जिन्हें भक्त बाबा की दिव्य लीला मानते हैं। ऐसी ही एक चर्चित घटना उस समय की है, जब बाबा के आश्रम में विशाल भंडारा चल रहा था और अचानक रसोई में घी समाप्त हो गया।
भंडारा बड़ा था और बड़ी संख्या में भक्त प्रसाद ग्रहण कर रहे थे। रसोई संभाल रहे सेवकों के सामने चिंता खड़ी हो गई कि अब भोजन कैसे बनेगा। बताया जाता है कि जब यह बात बाबा नीब करौरी महाराज तक पहुंची तो उन्होंने बिल्कुल सहज भाव से भक्तों से कहा कि नदी से पानी लेकर आओ।
भक्तों ने बाबा के आदेश का पालन किया और नदी से पानी भरकर ले आए। इसके बाद बाबा ने उस पानी को भंडारे की कड़ाहियों में डालने के लिए कहा। भक्तों के अनुसार, पानी डालने के बाद उसी से भंडारे का काम चलता रहा और भोजन तैयार किया गया।
इस घटना को लेकर बाबा के भक्त इसे उनकी कृपा और दिव्य शक्ति का प्रसंग मानते हैं। घटना का उल्लेख विभिन्न भक्त-संस्मरणों और बाबा से जुड़े प्रकाशित लेखों में भी मिलता है।
सबसे भावुक करने वाला प्रसंग इसके बाद बताया जाता है। जब बाद में हल्द्वानी से वास्तविक घी भंडारे के लिए पहुंच गया तो बाबा ने कथित तौर पर कहा कि अब नदी से लिया गया घी वापस गंगा मैया को लौटा दो।
भक्तों के लिए यह घटना केवल चमत्कार की कहानी नहीं, बल्कि बाबा के उस संदेश से जुड़ी मानी जाती है कि जहां सच्ची सेवा और श्रद्धा होती है, वहां संसाधनों की कमी भी सेवा के रास्ते में बाधा नहीं बनती।
आज भी कैंची धाम पहुंचने वाले भक्त बाबा नीब करौरी महाराज से जुड़े ऐसे संस्मरण सुनते हैं और उन्हें उनकी दिव्य लीलाओं के रूप में याद करते हैं। बाबा के भक्तों की आस्था में उनकी सबसे बड़ी पहचान यही है—प्रेम, सेवा और भगवान का स्मरण।
