स्कूल शिक्षा विभाग में फर्जी तबादला आदेश से मचा हड़कंप, 19 कर्मचारियों के स्थानांतरण का मामला

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बेमेतरा डीईओ को भी जांच के निर्देश, तीन दिन में मांगा गया विस्तृत प्रतिवेदन
बेमेतरा। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में फर्जी स्थानांतरण आदेश जारी किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। अज्ञात आरोपियों ने शासन के अवर सचिव के कथित फर्जी हस्ताक्षर और लेटरहेड का इस्तेमाल कर 19 शासकीय सेवकों के तबादले का आदेश जारी कर दिया। मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर हड़कंप मच गया है। लोक शिक्षण संचालनालय ने इसे गंभीरता से लेते हुए प्रदेश के कई जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों को जांच के निर्देश जारी किए हैं। इनमें बेमेतरा जिले के जिला शिक्षा अधिकारी भी शामिल हैं।
फर्जी हस्ताक्षर और लेटरहेड के इस्तेमाल का आरोप
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, 19 शासकीय सेवकों के स्थानांतरण से संबंधित एक ऐसा आदेश जारी किया गया, जिसमें शासन के अवर सचिव के हस्ताक्षर और आधिकारिक लेटरहेड का कथित रूप से फर्जी इस्तेमाल किया गया। सरकारी दस्तावेजों की प्रामाणिकता से जुड़ा यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता और आदेश जारी करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, फर्जी आदेश तैयार करने और जारी करने के पीछे कौन लोग शामिल हैं, इसका खुलासा जांच के बाद ही हो सकेगा।
तीन दिन में मांगी गई रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए लोक शिक्षण संचालनालय ने संबंधित जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से जांच करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से तीन दिनों के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा गया है। बेमेतरा जिले में भी इस आदेश के संबंध में जांच की जाएगी। जांच के दौरान आदेश की सत्यता, उसकी आधिकारिक पुष्टि, संबंधित कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी और आदेश के प्रसार के तथ्यों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।
सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा पर उठे सवाल
सरकारी विभागों में स्थानांतरण आदेश कर्मचारियों की पदस्थापना और प्रशासनिक व्यवस्था से सीधे जुड़े होते हैं। ऐसे में यदि किसी फर्जी आदेश के जरिए तबादलों को वास्तविक दिखाने की कोशिश की गई है, तो यह गंभीर मामला है। इससे कर्मचारियों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होने के साथ विभागीय कामकाज भी प्रभावित हो सकता है।
अब जांच रिपोर्ट के आधार पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित फर्जी आदेश कहां और कैसे तैयार किया गया, इसका इस्तेमाल किन उद्देश्यों से किया गया और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका रही। विभागीय जांच में दोषियों की पहचान होने पर नियमानुसार कार्रवाई की दिशा भी तय हो सकेगी।

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