दो गांव के ग्रामीणों का जोश-जज्बा और जुनून: प्रशासन को दिखाया आईना,बना डाला लकड़ी का पूल
मोहला मानपुर.
मोहला-मानपुर जिले के दो गांव खुरसेखुर्द और बेसली के लोगों ने प्रशासन को ऐसा आईना दिखाया कि वहां अब कोई नेता ग्रामीणों से वोट मांगने जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाएगा। क्योंकि ग्रामीणों ने तय कर लिया है कि इस गांव में कोई भी नेता या अधिकारी आए तो उसे उल्टा पांव चलता किया जाएगा।

दरअसल इन दोनों गांव के ग्रामीण कई अरसे से पूल की मांग करते आ रहे थे। लेकिन न तो कोई नेता और न ही कोई अधिकारी ने ध्यान दिया। आखिरकार दोनों गांव के ग्रामीणों ने आपस में बैठकर तय कि गांव मिलकर ही नाले पर लकड़ी का पूल बनाया जाए, तो स्कूली बच्चों से सहित ग्रामीणों को बरसात में आने-जाने में दिक्कत न हो।

बैठक में फैसला होने के बाद दो गांव के लोग लकड़ी का पूल बनाने में जुट गए। देखते ही देखते कुछ दिनों में पूल बनकर तैयार हो गया। अब न तो स्कूली बच्चों को आने-जाने में दिक्कतें हो रही है। और न ही वहां के लोगों को।
इस जिले के नक्सल प्रभावित आदिवासी बहुल मानपुर ब्लॉक के ग्रामीणों ने ऐसे पुल का निर्माण किया है जिसने ग्रामीणों को आवागमन की राहत तो दी ही है, साथ ही शासन-प्रशासन को विकास का आईना भी दिखाया है। ग्रामीणों ने बताया कि शासन और प्रशासन दोनों गांव के बीच पड़ने वाले नाले पर पूल बनाने की मांग कई साल से कर रहे थे। लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा था। इस कारण से स्कूली बच्चों के स्कूल आवागमन और ग्रामीणों के राशन, स्वास्थ्य समेत कई तरह की जरूरतों के लिए होने वाली आवाजाही के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
आखिर में ग्राम खुरसेखुर्द और बेसली के दो ग्रामीणों ने बैठक कर खुद पुल बनाने का निर्णय किया और अपनी खेती-किसानी व तमाम काम छोड़कर दोनों गांवों के प्रत्येक घर से ग्रामीण उस नाले पर जुटे। ग्रामीणों ने इस नाले में बांस और बल्लियों के सहारे ऐसी कारीगरी की कि नाले में एक देसी पुल का निर्माण हो गया। अब बच्चे इस देसी पुल से गुजरकर स्कूल पहुंचते हैं। ग्रामीणों का आवागमन और राशन की ढुलाई भी इससे आसान हो गया है। बतौर पुल नाले में बिछाई गई बांस की टाट पर मुरूम डालना ही बाकी रह गया है। मुरूम डालते ही छोटे चार पहिया वाहन भी इस देसी पुल से गुजरने लगेंगे।
