अंबिकापुर में छिपा था वासेपुर का गैंगस्टर शब्बीर, धनबाद पुलिस को चकमा देकर फरार
‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ की असली कहानी से जुड़ा आरोपी वर्षों से बदलकर रह रहा था पहचान, दबिश के दौरान पुलिस की चूक का उठाया फायदा
अंबिकापुर।
फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर की वास्तविक घटनाओं से जुड़े कुख्यात गैंगस्टर शब्बीर आलम के छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में वर्षों से छिपकर रहने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। झारखंड के धनबाद कोर्ट से फरार चल रहा शब्बीर आलम धनबाद पुलिस की दबिश के दौरान एक बार फिर पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। फिलहाल झारखंड और सरगुजा पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। �
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जानकारी के अनुसार शब्बीर आलम पर धनबाद के चर्चित कोयला माफिया और डॉन फहीम खान के परिवार की दो महिलाओं—उनकी मां नजमा खातून और मौसी शहनाज खातून—की गोली मारकर हत्या करने का आरोप है। वर्ष 2001 में हुए इस दोहरे हत्याकांड ने पूरे झारखंड में सनसनी फैला दी थी। इसी खूनी गैंगवार की घटनाओं से प्रेरित होकर बाद में गैंग्स ऑफ वासेपुर फिल्म बनाई गई थी। �
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पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक शब्बीर वर्ष 2013 में धनबाद कोर्ट से फरार हो गया था। उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी था और वह तब से फरार चल रहा था। हाल ही में धनबाद पुलिस को सूचना मिली कि वह अंबिकापुर के मोमिनपुरा इलाके में फर्जी पहचान के साथ रह रहा है। इस सूचना पर पुलिस टीम गुपचुप तरीके से अंबिकापुर पहुंची और दबिश दी। �
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बताया जा रहा है कि धनबाद पुलिस सादे कपड़ों में कार्रवाई करने पहुंची थी और उसने स्थानीय पुलिस को पहले से सूचना नहीं दी। इस कारण मौके पर मौजूद लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। इसी अफरा-तफरी का फायदा उठाकर शब्बीर आलम वहां से फरार हो गया। आरोपी के भागने के बाद धनबाद पुलिस ने सरगुजा पुलिस को जानकारी दी, जिसके बाद संयुक्त रूप से उसकी तलाश शुरू की गई, लेकिन देर रात तक उसका कोई सुराग नहीं मिल सका। �
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इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि स्थानीय पुलिस को पहले से विश्वास में लिया जाता, तो इतने बड़े और वांछित अपराधी के दोबारा फरार होने की संभावना कम हो सकती थी। अब सुरक्षा एजेंसियां शब्बीर आलम की तलाश में संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। �
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