विकास के दावों पर कीचड़ की मार: 1 किलोमीटर तक कंधों पर शव ले जाने को मजबूर ग्रामीण
बारिश में सड़क बनी दलदल, बोराई नदी पार कर हुआ अंतिम संस्कार; सक्ती जिला मुख्यालय से महज 1 किमी दूर सामने आई बदहाल व्यवस्था
जांजगीर/सक्ती।
विकास और बुनियादी सुविधाओं के बड़े-बड़े दावों के बीच सक्ती जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सरकारी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला मुख्यालय से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित क्षेत्र में ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए शव को करीब एक किलोमीटर तक कंधों पर ढोना पड़ा। बारिश के कारण सड़क पूरी तरह कीचड़ और दलदल में तब्दील हो गई थी, जिससे वाहन तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल हो गया।
ग्रामीणों ने बताया कि बदहाल सड़क के कारण शव वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका। मजबूरी में परिजन और ग्रामीणों ने शव को कंधों पर उठाया और बोराई नदी पार कर श्मशान घाट तक पहुंचे, जहां अंतिम संस्कार किया गया। पूरे घटनाक्रम का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद क्षेत्र में प्रशासन की कार्यशैली को लेकर नाराजगी बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात शुरू होते ही यह सड़क आवागमन लायक नहीं रहती। कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से सड़क निर्माण एवं मरम्मत की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। इसका खामियाजा आम लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी से लेकर आपात परिस्थितियों तक में भुगतना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब जिला मुख्यालय के इतने नजदीक यह हाल है, तो दूरस्थ गांवों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने तत्काल सड़क निर्माण, श्मशान तक पहुंच मार्ग और बारिश के दौरान सुरक्षित आवागमन की स्थायी व्यवस्था की मांग की है।
यह घटना एक बार फिर इस सवाल को सामने लाती है कि विकास के दावों के बीच आखिर कब तक ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के अभाव में ऐसी पीड़ा झेलने को मजबूर रहेंगे।
यदि चाहें, मैं इसे और अधिक आक्रामक “फ्रंट पेज” अखबारी शैली में भी तैयार कर सकता हूँ।
