ड्रोन की नजर, जीपीएस का पहरा: अवैध खनन पर साय सरकार का बड़ा प्रहार

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7,153 मामलों में कार्रवाई, 26 करोड़ रुपये की वसूली; हाईटेक निगरानी से खनन माफिया पर कसा शिकंजा


रायपुर।

छत्तीसगढ़ में अवैध खनन के खिलाफ साय सरकार ने तकनीक और सख्त कानूनों के सहारे निर्णायक लड़ाई छेड़ दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में खनिज साधन विभाग ने ड्रोन सर्विलांस, जीपीएस ट्रैकिंग और आरएफआईडी टैगिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर खनन माफिया की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नजर रखना शुरू कर दिया है। इसका असर भी साफ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2025-26 में अवैध खनन, परिवहन और भंडारण से जुड़े 7,153 मामलों में कार्रवाई करते हुए सरकार ने 25.95 करोड़ रुपये की समझौता राशि वसूल की है।
ड्रोन से निगरानी, मौके पर त्वरित कार्रवाई
खनन माफिया के बदलते तौर-तरीकों को देखते हुए सरकार ने निगरानी व्यवस्था को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाया है। फरवरी से जून 2026 के बीच केंद्रीय उड़नदस्ता दल ने ड्रोन सर्वे के जरिए 30 अवैध उत्खनन, 33 अवैध परिवहन और 21 अवैध भंडारण के मामलों का खुलासा किया। इन कार्रवाइयों में दोषियों से 1.23 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की गई।
अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन तकनीक के उपयोग से अब दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में भी निगरानी संभव हो गई है, जहां पहले कार्रवाई करना चुनौतीपूर्ण था।
कार्रवाई और वसूली में लगातार बढ़ोतरी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में अवैध खनन के 6,106 मामलों में 20.91 करोड़ रुपये की वसूली हुई थी। वहीं 2025-26 में कार्रवाई बढ़कर 7,153 मामलों तक पहुंच गई और वसूली भी लगभग 26 करोड़ रुपये हो गई।
चालू वित्त वर्ष 2026-27 में भी अभियान की रफ्तार बरकरार है। मई माह तक 1,747 मामलों में कार्रवाई कर 6.49 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वसूल की जा चुकी है।
रेत माफिया पर सबसे बड़ा शिकंजा
प्रदेश में लंबे समय से अवैध रेत खनन बड़ी चुनौती बना हुआ था। इसे नियंत्रित करने के लिए सरकार ने सितंबर 2025 में नई रेत नीति लागू की। इसके बाद ड्रोन आधारित निगरानी व्यवस्था शुरू की गई।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब तक 212 अवैध रेत उत्खनन, 3,717 अवैध रेत परिवहन और 103 अवैध रेत भंडारण के मामलों का खुलासा किया गया है। इन मामलों में 10.29 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वसूली गई है।
हर वाहन पर रहेगी जीपीएस और आरएफआईडी की नजर
खनिज परिवहन को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने खनिज ढोने वाले वाहनों में जीपीएस और आरएफआईडी टैग अनिवार्य करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे वाहनों की वास्तविक लोकेशन, तय मार्ग और परिवहन गतिविधियों की लगातार निगरानी संभव होगी। इससे फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल, अवैध मार्गों से परिवहन और ओवरलोडिंग जैसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद है।
कानून भी हुए और सख्त
तकनीकी निगरानी के साथ-साथ सरकार ने कानूनी प्रावधानों को भी मजबूत किया है। छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियमों में संशोधन कर दंडात्मक प्रावधानों को कठोर बनाया गया है। अब न्यायालयों में लंबित मामलों में जब्त वाहनों को भी सुरक्षा राशि जमा किए बिना मुक्त नहीं किया जाएगा। साथ ही पूरे प्रदेश में एक समान समझौता राशि लागू कर कार्रवाई में पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित की गई है।
राजस्व सुरक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर
खनिज संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़ में अवैध खनन न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों पर भी गंभीर असर डालता है। ऐसे में ड्रोन निगरानी, जीपीएस ट्रैकिंग, आरएफआईडी प्रणाली और सख्त कानूनी कार्रवाई के जरिए राज्य सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अवैध खनन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
तकनीक आधारित निगरानी और तेज कार्रवाई के चलते छत्तीसगढ़ का यह अभियान अब केवल अवैध खनन रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, राजस्व सुरक्षा और सुशासन की दिशा में एक प्रभावी मॉडल के रूप में उभर रहा है।

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