मांगों को लेकर सड़कों पर उतरेंगे 20 करोड़ मजदूर-किसान, 8 को निकाला जाएगा मशाल जुलूस और बाइक रैली

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raipur।

देशभर के ट्रेड यूनियनों द्वारा 9 जुलाई 2025 को देशव्यापी आम हड़ताल किया जाएगा। इसमें 20 करोड़ से अधिक मजदूर, किसान और कर्मचारी भाग लेंगे। यह हड़ताल केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को रद्द करने की मांग के साथ-साथ 23 सूत्रीय मांगों को लेकर की जा रही है। छत्तीसगढ़ में इस आंदोलन को सफल बनाने की जिम्मेदारी संयुक्त ट्रेड यूनियन मंच के संयोजक धर्मराज महापात्र और अन्य संगठनों ने संभाली है।
धर्मराज महापात्र ने आज रायपुर में इस देशव्यापी आम हड़ताल को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सन् 1886 में शिकागो शहर में 8 घंटे काम की मांग को लेकर मजदूरों का आंदोलन हुआ था, जिसमें मजदूरों पर पुलिस द्वारा दमन किया गया। परिणामस्वरूप कई मजदूर शहीद हो गए। तभी से हम उन शहीदों की याद में 1 मई को मई दिवस, याने अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाते आ रहे हैं। परिणामस्वरूप काम के घंटे आठ किए गए। इसी तरह हमारे पूर्वजों द्वारा संघर्ष, कुर्बानी के बाद अंग्रेजी राज से लेकर आज तक हम 44 श्रम कानून हासिल किए थे। आज की भाजपा की केंद्र सरकार इसे ही पलटने पर आमादा है।

उट्रेड यूनियनों की 23 सूत्रीय मांगें
श्रमिक-विरोधी श्रम संहिताएं (लेबर कोड) वापस लिया जाए।
सभी श्रमिकों को ₹26,000 न्यूनतम मजदूरी दो और हर 5 वर्ष में मूल्य सूचकांक के आधार पर इसका संशोधन सुनिश्चित किया जाए।
सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण और विनिवेश को रद्द करो। ठेकाकरण, संविदाकरण और आउटसोर्सिंग बंद किया जाए।
रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती और बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता।
भारतीय श्रम सम्मेलन (Indian Labour Conference) का आयोजिन जल्द किया जाए।
सभी के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल किया जाए। EPS के तहत ₹9,000 न्यूनतम पेंशन और जो किसी योजना में नहीं आते उन्हें ₹6,000 मासिक पेंशन दिया जाए।
रेल, सड़क परिवहन, कोयला, इस्पात, बंदरगाह, रक्षा, बैंक, बीमा, बिजली, पेट्रोलियम, डाक और दूरसंचार के निजीकरण पर रोक। राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (NMP) योजना रद्द किया जाए। बीमा क्षेत्र में 100% विदेशी निवेश (FDI) और समग्र बीमा कानून संशोधन प्रस्ताव वापस लिया जाए।
ठेका मजदूरों सहित सभी श्रमिकों और कर्मचारियों को “समान काम के लिए समान वेतन”।
8 घंटे के कार्यदिवस के प्रावधान का कड़ाई से पालन किया जाए।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, मितानिन, मध्यान्ह भोजन कर्मी, स्कूल सफाई कर्मचारी, गिग व अन्य प्लेटफॉर्म श्रमिकों को भी श्रमिक का दर्जा दिया जाए और उन्हें सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिले।
मनरेगा में 200 दिनों का काम सुनिश्चित किया जाए और मजदूरी में समुचित वृद्धि की जाए।
शिक्षा का व्यापारीकरण और निजीकरण पर रोक।
शहरी गरीबों को भी मनरेगा का लाभ दिया जाए।
किसानों को C2 फॉर्मूला के आधार पर लागत में 50% जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी।
कृषि उपज की खरीद सुनिश्चित करो और प्राकृतिक आपदा की स्थिति में सहायता हेतु विशेष कोष का निर्माण।
प्रवासी मजदूरों के लिए 1979 के प्रवासी श्रमिक कानून को पुनर्जीवित किया जाए।
योजना कर्मियों के लिए श्रम सम्मेलन की सिफारिशें लागू करो और न्यायालय के निर्देशानुसार ग्रेच्युटी का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
ई.पी.एफ. अंशदान को फिर से 12% किया जाए, जो घटाकर 10% किया गया है, जिससे मजदूरों को नुकसान हो रहा है।
सभी असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का पंजीकरण ई-श्रम पोर्टल पर अनिवार्य रूप से किया जाए और उन्हें योजनाओं का लाभ मिले।
मजदूरों के लिए स्वास्थ्य और सुरक्षा अधिनियमों को मजबूत करो और कार्यस्थलों पर दुर्घटना/बीमारी की स्थिति में उन्हें पूर्ण मुआवजा मिले।
गर्भवती महिला श्रमिकों को मातृत्व लाभ योजना का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
श्रमिकों पर लगे झूठे मुकदमे और आपराधिक धाराएं वापस लिया जाए।
संविधान की मूल भावना के अनुरूप श्रमिकों को संगठन, हड़ताल, प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिले।

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