तहसीलदारों की हड़ताल: एसडीएम को सौंपे जाएंगे काम
बालोद .
जिले में तहसीलदारों की हड़ताल से राजस्व के प्रकरण अटक गए है। इस कारण से खासकर किसानों और स्कूली छात्र-छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बता दें कि सोमवार से 17 सूत्रीय मांगों को लेकर जिला मुख्यालय के नए बस स्टैंड परिसर में छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ से जुड़े जिले के तहसीलदार, नायब तहसीलदार हड़ताल पर बैठे हैं। हड़ताल से एक दिन में ही राजस्व संबंधित 1000 से अधिक प्रकरण ठंडे बस्ते में चले गए हैं। बुधवार को राज्य स्तर पर हड़ताल हैं। इस कारण से आज भी तहसील में कोई काम नहीं होगा।
एसडीएम को सौंपी जिम्मेदारी
जानकारी के अनुसार कलेक्टर ने तहसीलदारों की हडताल के चलते राजस्व, जमीन व अन्य संबंधित प्रकरण आने पर निराकरण की जिम्मेदारी एसडीएम को सौंपी गई है। ताकि लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
जिला स्तरीय हड़ताल में तहसीलदार आशुतोष शर्मा, संध्या नामदेव, प्रीतम साहू, हेमंत पैकरा, हनुमंत श्याम, देवेंद्र नेताम, कोमल ध्रुव, नायब तहसीलदार रमेश मंडावी, मुकेश कुमार गजेंद्र, दीपक चंद्राकर, बी रूद्रपति, धनेंद्र कश्यप शामिल है। संघ पदाधिकारियों का दावा है कि हड़ताल से 7 तहसील बालोद, गुरूर, डौंडी, गुंडरदेही, डौंडीलोहारा, अर्जुंदा, मार्रीबंगला तहसील कार्यालय में करीब 1000 से प्रकरण अटक गए। नायब तहसीलदार पद को राजपत्रित किए जाने की भी मांग है।
आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र जारी नहीं हो रहे
प्रकरणों की सुनवाई नहीं हुई, प्रमाण पत्र नहीं बने तहसीलदारों की हड़ताल के चलते जिले के 7 तहसील कार्यालय में जनहित से जुड़े काम प्रभावित हुए। राजस्व प्रकरणों की सुनवाई नहीं होने से पक्षकार तहसील कार्यालय में आकर बिना काम कराए लौट गए। आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र जारी नहीं हो पाया। ग्रामीणों को भी बैरंग लौटना पड़ा। आशुतोष शर्मा ने बताया कि पहले भी विभाग एवं शासन को समय-समय पर विभिन्न समस्याओं से अवगत कराया जा चुका है। समस्याओं को प्रस्तुत करने के लिए विशेषज्ञ कमेटी, परिषद का गठन किया जाए।
