26 एकड़ गंज मंडी अब तक अधर में, 25 साल से नहीं हो सका व्यवस्थापन – व्यापारी और आमजन परेशान

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26 एकड़ गंज मंडी अब तक अधर में, 25 साल से नहीं हो सका व्यवस्थापन – व्यापारी और आमजन परेशान

रायपुर। नगर निगम रायपुर द्वारा पिछले 25 वर्षों में गंज मंडी के व्यवस्थापन के लिए कई योजनाएं बनाई गईं, लेकिन कोई भी सफल नहीं हो सकी। इसका बड़ा कारण यह है कि अलग-अलग स्थानों पर खाली जमीन छोड़ दी गई और उचित कदम नहीं उठाए गए।

सूत्रों के अनुसार, बैरनबाजार, अजर्सेन चौक, शांति नगर, गांधी मैदान, टेलीबांधा नाका, मालवीय रोड, सुभाष स्टेडियम कैंपस, खमतराई सब्जी पारा सहित करीब 20 से अधिक जगहें ऐसी हैं, जहां पिछले कई सालों से प्रस्तावित योजना या तो रुकी हुई है या अधूरी छोड़ दी गई है।

मुख्य समस्या यह है कि—

शासन एवं निगम द्वारा बनाए गए कांप्लेक्सों में आज तक कब्ज़ेदार नहीं मिले।

50 प्रतिशत दुकानें खाली पड़ी हैं।

जिन जगहों पर काम हुआ भी, वहां भी अव्यवस्था और ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी हुई है।

भारतीय जनता पार्टी ने नगर निगम चुनाव घोषणा पत्र में वादा किया था कि “हम गंज मंडी के व्यापारी भाइयों को मालिकाना हक दिलाकर कानूनी मान्यता के साथ स्थायी पट्टा अधिकार देंगे।” लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो पाई है।

व्यापारी संगठनों का कहना है कि यदि 26 एकड़ गंज मंडी का मालिकाना हक व्यापारियों को मिल जाए, तो शासन को भी राजस्व की बड़ी प्राप्ति होगी और क्षेत्र में विकास कार्यों की राह खुलेगी।

व्यापारियों की मांग
गंज मंडी के व्यापारी लगातार शासन से मांग कर रहे हैं कि उन्हें मालिकाना हक दिया जाए, ताकि उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान हो सके और रायपुर शहर के व्यावसायिक ढांचे में सुधार आए।

👉 कुल मिलाकर, 26 एकड़ गंज मंडी का मुद्दा रायपुर के लिए लंबे समय से अटका हुआ है। यदि सरकार ने ठोस पहल की तो न सिर्फ व्यापारियों को राहत मिलेगी बल्कि शासन को भी करोड़ों रुपए का राजस्व मिलेगा और क्षेत्र का कायाकल्प संभव हो सकेगा।

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