प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
कर्मचारियों के चिकित्सा खर्च के भुगतान में अब नहीं होगी देर, विभागों और अफसरों को समय-सारिणी का कड़ाई से पालन करने का निर्देश
बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य के विभागों और जिम्मेदार अफसरों को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि कर्मचारियों के चिकित्सा व्यय प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) में अनावश्यक देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने सभी विभागों को स्पष्ट टाइमलाइन जारी की है और तय समय में भुगतान प्रक्रिया पूरी करने को अनिवार्य कर दिया है।
क्या कहा हाईकोर्ट ने?
हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि—
स्थानीय स्तर पर सभी चिकित्सा बिलों की जांच और स्वीकृति की प्रक्रिया 15 दिनों के भीतर पूरी की जाए।
राज्य स्तर पर लंबित मामलों को अधिकतम 90 दिनों के भीतर निपटाया जाए।
कर्मचारी और अधिकारी इलाज के बाद महीनों तक प्रतिपूर्ति राशि के लिए भटकते न रहें, इसके लिए विभाग जवाबदेह रहेंगे।
कर्मचारियों के लिए राहत
इस फैसले से हजारों सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि चिकित्सा खर्च का भुगतान विलंबित होने से उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता था। कोर्ट ने कहा कि समय पर मेडिकल क्लेम का निपटारा कर्मचारियों का अधिकार है और विभागों की जिम्मेदारी।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने यह भी माना कि कई विभागों में फाइलें लंबे समय तक लंबित रहती हैं, जिससे कर्मचारी परेशान होते हैं। इसलिए अब देरी पर उच्च अधिकारियों को जवाब देना होगा।
राज्य के सभी विभागों में हलचल
आदेश के बाद सभी विभागों को अपनी प्रक्रिया दुरुस्त करने और समय-सारिणी का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए जा रहे हैं।
