शिक्षा कर्मियों को पिछली सेवा के आधार पर क्रमोन्नति देने से इनकार, 1,188 याचिकाएं खारिज

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बिलासपुर।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षा कर्मियों से जुड़ा बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाते हुए पिछली सेवा अवधि को गिनकर क्रमोन्नति (Promotion) देने की मांग को खारिज कर दिया है। इस मामले में कुल 1,188 याचिकाएं दायर की गई थीं, जिन्हें कोर्ट ने एक साथ निपटाते हुए अस्वीकार कर दिया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि शिक्षा कर्मियों की संविलियन (समायोजन) के बाद की सेवा ही नियमित सेवा मानी जाएगी, इसलिए संविलियन से पहले की अवधि को क्रमोन्नति के लिए आधार नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट के इस फैसले का असर प्रदेश के बड़े वर्ग पर पड़ेगा, जो लंबे समय से अपनी पूर्व सेवा अवधि को मान्यता दिलाने की मांग कर रहे थे।

हाईकोर्ट के निर्णय के बाद अब शिक्षा विभाग के सामने भी स्थिति स्पष्ट हो गई है कि प्रोमोशन केवल संविलियन के बाद की नियमित सेवा के आधार पर ही दिया जाएगा।

यह फैसला राज्यभर के शिक्षकों-कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

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