शहीद वीर नारायण सिंह जनजातीय संग्रहालय बना प्रेरणा का केंद्र, दो माह में 72 हजार से अधिक दर्शक

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रायपुर.
नवा रायपुर स्थित आदिवासी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में निर्मित शहीद वीर नारायण सिंह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय अपने उद्देश्यों को सफलतापूर्वक साकार कर रहा है। अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, शौर्य और बलिदान को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने वाला यह संग्रहालय आज देश-विदेश के पर्यटकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आम नागरिकों के लिए प्रेरणा और ज्ञान का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के रजत जयंती वर्ष पर 01 नवंबर 2025 को इस भव्य संग्रहालय को जनता को समर्पित किए जाने के बाद, महज दो महीनों में ही 72 हजार से अधिक दर्शक इसका अवलोकन कर चुके हैं। यह आंकड़ा स्वयं संग्रहालय की लोकप्रियता और उपयोगिता को दर्शाता है।
पर्यटन और शैक्षणिक रुचि का केंद्र
स्कूलों और कॉलेजों के छात्र-छात्राओं के साथ-साथ बड़ी संख्या में आमजन संग्रहालय देखने पहुंच रहे हैं। छुट्टियों और त्योहारों के दौरान यहां दर्शकों की संख्या में विशेष बढ़ोतरी देखी जा रही है। संग्रहालय न केवल इतिहास को दर्शाता है, बल्कि युवाओं को अपने गौरवशाली अतीत से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी बन रहा है।
डिजिटल तकनीक से सुसज्जित आधुनिक संग्रहालय
आदिम जाति विकास विभाग के मार्गदर्शन में निर्मित यह संग्रहालय पूरी तरह डिजिटल तकनीक से लैस है। आगंतुक क्यूआर कोड स्कैन कर, ऑडियो-वीडियो प्रस्तुति, माइक्रोफोन और डिजिटल मॉनिटर के माध्यम से जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। दर्शकों की सुविधा के लिए प्रशिक्षित गाइड की भी व्यवस्था की गई है।
सुविधाओं का विशेष ध्यान
संग्रहालय परिसर में शुद्ध पेयजल, पार्किंग, शौचालय, सूचना केंद्र, प्राथमिक उपचार केंद्र जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह परिसर पूरी तरह सीसीटीवी निगरानी में है। दिव्यांगजनों के लिए व्हीलचेयर तथा शिशुवती महिलाओं के लिए शिशु देख-रेख कक्ष की भी व्यवस्था की गई है। संग्रहालय के संचालन से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्त्रोत
आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने कहा कि यह संग्रहालय छत्तीसगढ़ के जनजातीय समाज के शौर्य, बलिदान और गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि संग्रहालय का उद्देश्य लोगों तक जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों की गाथा पहुंचाना था, जो आज बड़ी संख्या में दर्शकों की उपस्थिति से पूर्ण हो रहा है।

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