दो साल से आयुष्मान इंसेंटिव का इंतजार, सरकारी डॉक्टरों और नर्सों में बढ़ी नाराजगी

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करीब 300 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित होने का दावा, निजी अस्पतालों को नियमित भुगतान मिलने से असंतोष
रायपुर।

प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों में आयुष्मान भारत योजना के तहत मिलने वाली इंसेंटिव राशि को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि पिछले दो वर्षों से उन्हें इंसेंटिव का भुगतान नहीं मिला है, जबकि निजी अस्पतालों को योजना के तहत भुगतान नियमित रूप से किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र मरीजों का उपचार करने वाले सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) देने का प्रावधान है। आरोप है कि प्रदेशभर के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के कर्मचारियों का करीब 300 करोड़ रुपये से अधिक का इंसेंटिव लंबित है।
स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि जब भी इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से जानकारी ली जाती है, तो जल्द भुगतान का आश्वासन दिया जाता है। लेकिन पिछले दो वर्षों से यही आश्वासन दोहराया जा रहा है और अब तक राशि जारी नहीं हुई है।
डॉक्टरों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी संख्या में आयुष्मान मरीजों का इलाज किया जाता है। ऐसे में समय पर इंसेंटिव नहीं मिलने से कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है। उनका यह भी कहना है कि यदि निजी अस्पतालों को समय पर भुगतान किया जा सकता है तो सरकारी अस्पतालों के कर्मचारियों का भुगतान भी प्राथमिकता से होना चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक, लंबित भुगतान का मामला उच्च स्तर पर विचाराधीन है और बजट उपलब्ध होते ही भुगतान की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। हालांकि, इस संबंध में विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
सरकारी स्वास्थ्यकर्मियों ने लंबित इंसेंटिव का शीघ्र भुगतान करने की मांग करते हुए कहा है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आगे की रणनीति पर विचार कर सकते हैं।
(नोट: करीब 300 करोड़ रुपये लंबित होने का आंकड़ा संबंधित पक्षों के दावे पर आधारित है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग का आधिकारिक पक्ष लिया जाना शेष है।)

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