रायपुर की सफाई व्यवस्था पर सवाल: वार्डों में कम कर्मचारी, गंदगी से बढ़ा मौसमी बीमारियों का खतरा

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रायपुर। राजधानी रायपुर में नगर निगम की सफाई व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शहर के अधिकांश वार्डों में कई हफ्तों से नालियों की नियमित सफाई नहीं हो रही है और सड़कों पर भी गंदगी का अंबार देखने को मिल रहा है। बारिश के मौसम में यह स्थिति और गंभीर होती जा रही है, जिससे नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है।
जानकारी के अनुसार, नगर निगम के रिकॉर्ड में प्रत्येक वार्ड में 30 से 35 सफाई कर्मचारियों की तैनाती दर्शाई गई है, लेकिन वास्तविकता में मौके पर सिर्फ 20 से 25 कर्मचारी ही काम करते नजर आते हैं। कर्मचारियों की कमी का सीधा असर शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ रहा है।
इस बीच नगर निगम के अधिकारियों और कुछ जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। शहर में सफाई व्यवस्था में कथित कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में कांग्रेस के तत्कालीन एमआईसी सदस्य श्रीकुमार मेनन ने भी सामान्य सभा में यह आरोप लगाया था कि सफाई व्यवस्था में हर महीने एक से डेढ़ करोड़ रुपये तक का भ्रष्टाचार होता है।
मानसून में बढ़ा खतरा
मानसून की बारिश शुरू होने के साथ ही कई इलाकों में नालियां जाम होने से पानी सड़कों पर भर रहा है। नियमित सफाई नहीं होने के कारण जलभराव, गंदगी और मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की आशंका है। इससे डेंगू, मलेरिया, वायरल फीवर और अन्य मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। अस्पतालों में भी इन दिनों मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है।
जनता की मांग
शहरवासियों का कहना है कि नगर निगम को वार्डों में सफाई कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित करनी चाहिए, नियमित मॉनिटरिंग करनी चाहिए और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो बारिश के दौरान शहर को गंभीर स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ सकता है।

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