नकटी गांव में बेदखली पर बड़े सवाल: जिन गरीबों को आवास दिया, अब उसी जमीन पर बनेगी विधायक कॉलोनी?

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रायपुर।

माना क्षेत्र के नकटी गांव में प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के लिए की गई बेदखली की कार्रवाई अब गंभीर सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिन परिवारों को शासन ने पहले विभिन्न आवास योजनाओं, जिनमें प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी भी शामिल बताए जा रहे हैं, के तहत बसाया था, अब उन्हीं लोगों को हटाकर उसी जमीन पर विधायक कॉलोनी बनाई जा रही है। इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित परियोजना के लिए पहले 77 परिवारों को नोटिस जारी किया गया था, जबकि प्रशासन की कार्रवाई में करीब 80 मकानों पर बुलडोजर चलाया गया। कई रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि इनमें प्रधानमंत्री आवास एवं अन्य सरकारी आवास योजनाओं के तहत बने मकान भी शामिल थे।


ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि जमीन पर उनका कब्जा अवैध था, तो फिर वर्षों पहले उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ और आवास निर्माण की स्वीकृति कैसे मिली? अब उसी जमीन को विकसित कर छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड द्वारा विधायक कॉलोनी तैयार किए जाने की योजना पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों के बीच यह चर्चा है कि विकसित आवास विधायकों को आवंटित या बेचे जाएंगे, जिससे सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि इस दावे पर सरकार की ओर से ऐसी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
बताया जा रहा है कि नकटी गांव में करीब 56 एकड़ भूमि विधायक कॉलोनी परियोजना के लिए चिन्हित है, जिसमें से लगभग आधे हिस्से (करीब 28 एकड़) में विधायक कॉलोनी विकसित किए जाने की योजना है। पहले भी यह जानकारी सामने आई थी कि लगभग 17 एकड़ खाली भूमि उपलब्ध होने के बावजूद ग्रामीणों को हटाने की आवश्यकता पर सवाल उठाए गए थे।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विकास के नाम पर गरीबों को उजाड़ना उचित है, खासकर तब जब उन्हीं परिवारों को पहले शासन की योजनाओं का लाभ दिया गया हो? नकटी गांव का मामला अब सिर्फ बेदखली का नहीं, बल्कि पुनर्वास, सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता और विकास मॉडल पर भी बड़ा सवाल बनता जा रहा है।

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