सेना और पैरामिलिट्री के खिलाफ फेसबुक पोस्ट करना पड़ा भारी, हाईकोर्ट ने CISF कॉन्स्टेबल की सैलरी कटौती की सज़ा को माना सही
बिलासपुर।
भारतीय सेना और पैरामिलिट्री फ़ोर्स के खिलाफ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करना एक CISF कॉन्स्टेबल को महंगा पड़ गया। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने विभाग द्वारा दी गई सैलरी में कटौती की सज़ा को सही ठहराते हुए कॉन्स्टेबल की याचिका खारिज कर दी।
मामले के अनुसार, CISF में पदस्थ कॉन्स्टेबल ने अपने फेसबुक अकाउंट पर भारतीय सेना और पैरामिलिट्री बलों के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट साझा की थी। विभागीय जांच में यह आचरण सेवा नियमों और अनुशासन के विपरीत पाया गया। इसके बाद विभाग ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उसकी वेतन वृद्धि/सैलरी में कटौती की सज़ा दी।
कॉन्स्टेबल ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उसने तर्क दिया कि विभाग की कार्रवाई अनुचित और अत्यधिक कठोर है। हालांकि, सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना कि सशस्त्र बलों और अर्धसैनिक बलों के कर्मियों से उच्च स्तर के अनुशासन, संयम और जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। सोशल मीडिया पर इस तरह की टिप्पणी सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि विभाग द्वारा दी गई सज़ा न तो मनमानी है और न ही अनुपातहीन। इसलिए न्यायालय को इसमें हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं मिला। इसी के साथ कोर्ट ने कॉन्स्टेबल की याचिका खारिज कर दी और विभागीय कार्रवाई को बरकरार रखा।
मुख्य बातें:
भारतीय सेना और पैरामिलिट्री फ़ोर्स के खिलाफ फेसबुक पोस्ट का मामला।
विभागीय जांच में सेवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि।
सैलरी में कटौती की सज़ा के खिलाफ दायर याचिका खारिज।
हाईकोर्ट ने कहा— अनुशासित बलों के कर्मियों के लिए सोशल मीडिया पर जिम्मेदार आचरण अनिवार्य।
