सियायत के क्या मायने है पूर्व मंत्री ही जानें,पर अस्तित्व की लड़ाई नजर आ रही

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रायपुर.

सियासत में कब कौन सा मुद्दा तेजी से जोर पकड़ ले कह नहीं सकते। राज्य की राजनीति में इस बार राज्यपाल, कलेक्टर और पूर्व गृहमंत्री को लेकर कांग्रेस- भाजपा में सियासत का बाजार गर्म है। पूरी सियासत कोरबा में राज्यपाल के प्रवास के दौरान पूर्व गृह मंत्री ननकी राम राज्य पाल के सामने खड़े और कलेक्टर साहब बैठे हुए इस की तस्वीर को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है। दरअसल, पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने इस तस्वीर को अपने सोशल मीडिया में साझा करते हुए कलेक्टर पर तंज कसा था। इसके बाद कलेक्टर ने इस पर आपत्ति लेते हुए पूर्व मंत्री अग्रवाल को पोस्ट डिलिट करने का आदेश निकाला था। इसे लेकर ही सियासत हो रही है। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि इस सियासत के क्या मायने हैं दोनों पूर्व मंत्री ही बता सकते हैं। लेकिन एक बात तो स्पष्ट नजर आ रही है कि दोनों नेताओं के अस्तित्व की लड़ाई है। क्योंकि, सत्ता जाने के बाद नेताओं को अपना अस्तित्व बनाए रखना बहुत जरूरी होता है।

यह है पूरा मामला

तस्वीर में राज्यपाल के बगल में कलेक्टर अजीत वसंत बैठे नजर आ रहे हैं, जबकि वरिष्ठ आदिवासी नेता और पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर खड़े दिख रहे हैं। जब इस तस्वीर पर सवाल उठाते हुए पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर टिप्पणी की तो उसे डिलीट करने कलेक्टर अजीत वसंत ने उन्हें नोटिस जारी किया। अब इसपर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पीसीसी चीफ दीपक बैज और खुद ननकीराम कंवर भी मैदान में उतर आए हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की प्रतिक्रिया

पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने एक्स पोस्ट पर लिखा कि अगर अधिकारी प्रशासन की जगह “मुखियाजी” का निजी “कलेक्टर” है तो उसको अधिकार मिल जाता है कि वह महामहिम के बराबर बैठ सकता है, “मुखियाजी” के ही दल के वरिष्ठतम नेता को अपने सामने खड़ा रख सकता है और इसकी आलोचना करने पर किसी को भी “नोटिस” भेज सकता है। क्षीर सागर की शैया पर बस “धन” के छींटे पड़ते रहें तो “मुखियाजी” को न अपने दल की चिंता और न महामहिम के पद की गरिमा की।

दीपक बैज ने भी जताया ऐतराज

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने एक्स पोस्ट पर लिखा कि यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिले के कलेक्टर महामहिम राज्यपाल के बराबर में बैठते हैं। स्वयं राज्यपाल को उन्हें टोकना पड़ता है। एक सर्वमान्य सीनियर आदिवासी नेता ननकीराम कंवर जी को अपने सामने खड़ा रखते हैं और इस पर प्रतिक्रिया देने पर प्रदेश के पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को प्रतिक्रिया वापस लेने निर्देश पत्र जारी कर देते हैं। क्या राज्यपाल के जिलों के दौरे से भाजपा इतनी क्षुब्ध हो गई कि इशारों इशारों में राज्यपाल की गरिमा से छेड़छाड़ कर रही है? पूर्व मंत्री और भाजपा के सीनियर आदिवासी नेता ननकी राम कंवर ने इस सरकार की पोल खोलकर रख दी है, सुनिए केदार कश्यप ये हाल है प्रदेश में आदिवासी नेताओं का तो आदिवासियों का क्या हाल होगा? कहीं इन सबके पीछे आपका हाथ तो नहीं..? यह भी जांच का विषय है।

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