छत्तीसगढ़ में एनएचएम संविदा कर्मियों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित, लेकिन नेताओं–अफसरों को फर्क नहीं

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रायपुर.

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मचारियों की हड़ताल का असर पूरे छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर रूप से पड़ रहा है। मरीजों को दवाइयां, परामर्श और आपातकालीन इलाज तक नहीं मिल पा रहा।

ग्रामीण अंचलों में टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं और आपात प्रसव पूरी तरह प्रभावित हैं। हड़ताल के चलते कई जगहों पर स्वास्थ्य केंद्रों के गेट पर ताला लटका हुआ है।

रायगढ़ जिले में एक दर्दनाक घटना हुई—सड़क दुर्घटना के शिकार गंभीर घायल को लोग अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन अस्पताल का गेट बंद था। अंदर कोई स्वास्थ्यकर्मी नहीं था। घायल बाहर ही तड़पता रहा, पर उसे तत्काल इलाज नहीं मिल सका।

आम जनता परेशान है, कई मजबूरी में निजी अस्पतालों का सहारा ले रहे हैं, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।

लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि न तो नेताओं को और न ही अधिकारियों को इस हड़ताल से कोई फर्क पड़ता दिख रहा है। मरीजों की पीड़ा पर किसी ने गंभीर पहल नहीं की है। संविदा कर्मचारियों की मांगों—वेतन वृद्धि, सेवा शर्तों में सुधार और नियमितिकरण—को लेकर बातचीत की बजाय अब तक सिर्फ आश्वासन दिया गया है।

👉 स्वास्थ्य सेवाओं की यह बदहाली और जिम्मेदारों का उदासीन रवैया जनता के गुस्से को और बढ़ा रहा है।

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