जनतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट संघर्ष जरूरी : बी. सान्याल की स्मृति सभा में नेताओं का संकल्प
जनतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट संघर्ष जरूरी : बी. सान्याल की स्मृति सभा में नेताओं का संकल्प
रायपुर, 24 अगस्त।
रायपुर डिवीजन इंश्योरेंस एम्पलाइज यूनियन द्वारा रविवार को आयोजित का. बी. सान्याल की स्मृति सभा में देशभर के ट्रेड यूनियन नेताओं, वामपंथी संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और संस्कृति कर्मियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में जनतंत्र और संविधान पर बढ़ते हमलों का मुकाबला केवल सामूहिक प्रतिरोध से ही संभव है।
उल्लेखनीय है कि का. बी. सान्याल का निधन 21 जुलाई को हुआ था। अपनी अंतिम इच्छा के अनुरूप उनका पार्थिव शरीर रायपुर मेडिकल कॉलेज को शोध एवं अध्ययन हेतु दान कर दिया गया था।

नेताओं ने याद किए संघर्ष
सभा की अध्यक्षता का. अजीत केतकर (इंदौर) ने की जबकि शोक प्रस्ताव का. धर्मराज महापात्र (रायपुर) ने प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर का. सुधाकर उर्ध्वरेशे (इंदौर), का. अमानुल्ला खान (हैदराबाद), का. संजीव शर्मा (मेरठ), का. एम. के. नंदी (रायपुर), डॉ. विप्लव बंदोपाध्याय (रायपुर), का. बालसिंह (सरगुजा), का. हरनाथ सिंह (रायपुर), का. शिरीष नलगुंडवार (रायपुर), का. नवीन गुप्ता (रायपुर), का. भानुप्रताप (दिल्ली), का. डी. वी. एस. रेड्डी (भिलाई), का. निसार अली (रायपुर), का. रंगा वेणी (भिलाई), का. रवि बैनर्जी (रायपुर), का. राजेश शर्मा (बिलासपुर), का. बृजेश सिंह (ग्वालियर), का. दिनेश पटेल (रायपुर), का. राजेश अवस्थी (रायपुर), का. अतुल देशमुख (रायपुर) व का. धनंजय पांडे (रायपुर) समेत अनेक नेताओं ने अपने विचार रखे।
का. बी. सान्याल के भतीजे विवेक सान्याल और पोतियां स्निग्धा महापात्र व मौली सान्याल ने भी अपने संस्मरण साझा किए।
समाजवाद व धर्मनिरपेक्षता के पैरोकार
वक्ताओं ने कहा कि का. बी. सान्याल मेहनतकश आंदोलन के जुझारू, ईमानदार और प्रतिबद्ध नेता थे। वे आजीवन मार्क्सवादी विचारधारा पर डटे रहे और धर्मनिरपेक्षता, सांप्रदायिक सद्भाव तथा समाजवाद के प्रबल प्रवक्ता रहे। बांग्लादेश से विस्थापन का दर्द झेलकर भारत आए सान्याल नफरत की राजनीति के कट्टर विरोधी थे। उनका मानना था कि “नफरत इंसानियत को डुबो देगी, इसे केवल प्यार से ही खत्म किया जा सकता है।”
उन्होंने एलआईसी कर्मचारी संगठन से ट्रेड यूनियन जीवन की शुरुआत की और अपने 39 वर्षों की सेवा में मंडल, जोन और राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्वकारी पदों तक पहुंचे। एलआईसी में प्रबंधन की गलत नीतियों के खिलाफ संघर्ष के कारण उन्हें निलंबन और दमन झेलना पड़ा, लेकिन हर बार वे मजबूती से डटे रहे।
आंदोलन की विरासत
का. सान्याल ने ट्रेड यूनियनों के साथ-साथ एसएफआई, डीवाईएफआई, किसान सभा, आदिवासी महासभा और जनवादी महिला समिति जैसे जनसंगठनों के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपने संघर्षों के जरिए छत्तीसगढ़ में वाम आंदोलन की मजबूत नींव रखी।
लाल सलाम के नारों के बीच श्रद्धांजलि
कार्यक्रम के अंत में कलाकार श्रीमती गोहिल द्वारा बनाए गए का. सान्याल के पोर्ट्रेट का अनावरण का. अमानुल्ला खान ने किया। उपस्थित जनसमूह ने “लाल सलाम” के नारों के साथ उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
सभा का संचालन का. सुरेंद्र शर्मा (महासचिव, रायपुर डिवीजन इंश्योरेंस एम्पलाइज यूनियन) ने किया तथा आभार प्रदर्शन का. राजेश पराते ने किया।
वक्ताओं ने संकल्प लिया कि का. बी. सान्याल के बताए रास्ते पर चलते हुए जनतंत्र, संविधान और मेहनतकश आंदोलन की रक्षा व मजबूती के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
