नक्सल पीड़ितों ने सांसदों से लगाई गुहार, उपराष्ट्रपति पद के प्रत्याशी बी. सुदर्शन रेड्डी का किया विरोध
बस्तर शांति समिति की दिल्ली में प्रेस वार्ता –
नई दिल्ली।
देश की राजधानी में आज बस्तर से पहुंचे नक्सल पीड़ितों ने कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में प्रेस वार्ता कर अपनी व्यथा देश के सामने रखी। पीड़ितों ने बस्तर शांति समिति के बैनर तले एकजुट होकर उपराष्ट्रपति पद के प्रत्याशी बी. सुदर्शन रेड्डी की उम्मीदवारी का कड़ा विरोध किया और सभी सांसदों से अपील की कि वे उन्हें समर्थन न दें।
नक्सल पीड़ितों ने आरोप लगाया कि सुदर्शन रेड्डी वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने सलवा जुडूम पर प्रतिबंध लगाया था। उनके अनुसार, इसी फैसले के बाद बस्तर में माओवादियों का आतंक बढ़ा और निर्दोष आदिवासी, किसान व सुरक्षाबल बर्बर हिंसा का शिकार हुए।प्रेस वार्ता में कई पीड़ितों ने अपने दर्द भरे अनुभव साझा किए—सियाराम रामटेके, जो अब दिव्यांग हो चुके हैं, ने कहा कि माओवादियों ने उन पर गोलियां चलाई और पत्थरों से हमला किया। उनका मानना है कि अगर सलवा जुडूम पर प्रतिबंध नहीं लगता, तो शायद वह आज सामान्य जीवन जी रहे होते।
केदारनाथ कश्यप ने बताया कि नक्सलियों ने उनके भाई की निर्मम हत्या की थी। वे कहते हैं कि यदि 2011 में सलवा जुडूम बंद न हुआ होता, तो उनके भाई की जान बच सकती थी।शहीद जवान मोहन उइके की पत्नी आरती ने रोते हुए कहा कि नक्सलियों ने घात लगाकर उनके पति की हत्या कर दी, उस समय उनकी बेटी सिर्फ तीन महीने की थी। आज 10 साल की वह बच्ची भी अपनी माँ के साथ दिल्ली पहुंची और सांसदों से इंसाफ की गुहार लगाई।
महादेव दूधी, जो चिंगावरम हमले के पीड़ित हैं, ने टूटी-फूटी हिंदी में बताया कि बस हमले में उन्होंने अपना पैर खो दिया और अब अपाहिज की जिंदगी जीने को मजबूर हैं।बस्तर शांति समिति के जयराम और मंगऊ राम कावड़े ने बताया कि नक्सल पीड़ितों ने सांसदों को पत्र लिखकर भी यही अपील की है कि सुदर्शन रेड्डी का समर्थन न करें।
समिति का कहना है कि बस्तर के हजारों परिवार सलवा जुडूम पर प्रतिबंध के बाद माओवादी हिंसा के शिकार बने और अब वे नहीं चाहते कि ऐसे किसी व्यक्ति को देश का उच्च constitutional पद मिले, जिसने उनके जीवन को नरक बना दिया।
