पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय में खुलेआम शासकीय पदों का बंदरबांट, आयु सीमा फेल भ्रष्टाचार पास

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एनएसयूआई ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग

रायपुर.
पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में टेक्नीशियन ग्रेड-2 के पद पर बालगोविंद नायक नामक कर्मचारी की नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों तथा सूचना का अधिकार (RTI) से प्राप्त अभिलेखों के परीक्षण के बाद यह गंभीर तथ्य सामने आया है कि उक्त नियुक्ति विश्वविद्यालय के अपने ही नियमों, विज्ञापन शर्तों और आयु-मानदंडों के खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन के साथ की गई है।

विश्वविद्यालय के विज्ञापन दिनांक 28.12.2011 के अनुसार सामान्य वर्ग के लिए अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष निर्धारित थी, जबकि बालगोविंद नायक की जन्मतिथि 15.07.1974 है। इस आधार पर वे विज्ञापन तिथि को 37 वर्ष 5 माह 13 दिन के थे — अतः वे स्पष्ट रूप से अपात्र थे, फिर भी उनकी नियुक्ति अनारक्षित वर्ग में कर दी गई।

एनएसयूआई जिला अध्यक्ष शान्तनु झा ने बताया कि यह मामला मात्र अपात्र नियुक्ति का नहीं है, बल्कि इससे भी अधिक गंभीर है वह तथ्य कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस नियुक्ति को बचाने के लिए क्षेत्रीय उच्च शिक्षा कार्यालय, राज्यपाल कार्यालय, UGC और NAAC जैसे उच्च संस्थानों को व्यवस्थित रूप से गलत एवं भ्रामक जानकारी भेजी।
दस्तावेजों से यह भी सिद्ध होता है कि बालगोविंद नायक की अनारक्षित श्रेणी में नियुक्ति के बावजूद, प्रशासन ने शासन को यह गलत सूचना दी कि उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग के रूप में नियुक्त किया गया है।

शान्तनु झा ने बताया कि एनएसयूआई के पास ऐसी अनेक प्रमाणिक सामग्रियाँ और अभिलेख उपलब्ध हैं, जो विश्वविद्यालय के कुछ अधिकारियों और बालगोविंद नायक के बीच सांठ–गांठ की ओर स्पष्ट संकेत करते हैं। शिकायतों और जांच को वर्षों तक रोककर रखने, फाइलों को दबाने तथा नोटशीटों में मिथ्यापूर्ण प्रविष्टियाँ दर्ज करने जैसी गंभीर अनियमितताएँ भी दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से दर्ज हैं।

इन गंभीर तथ्यों के आधार पर एनएसयूआई, रायपुर मांग करती है कि विश्वविद्यालय तत्काल प्रभाव से—

प्राप्त साक्ष्यों की सत्य-परीक्षा कर बालगोविंद नायक की नियुक्ति को निलंबित अथवा समाप्त करे,प्रकरण की जांच उच्च-स्तरीय / राज्य-स्तरीय समिति से करवाई जाए,तथा शासन/प्रशासन को गलत जानकारी भेजने वाले संलिप्त अधिकारियों के विरुद्ध विधिक, अनुशासनात्मक एवं दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

शान्तनु झा ने चेतावनी देते हुए कहा कि—
“यदि इस पूरे प्रकरण पर शीघ्र निर्णयात्मक और पारदर्शी कार्रवाई नहीं की जाती है, तो एनएसयूआई रायपुर लोकतांत्रिक, संवैधानिक और म तरीकों से सड़क पर उतरकर आंदोलन चलाने के लिए बाध्य होगी जिसकी सारी जिम्मेदारी विश्विद्यालय प्रशाशन की होगी।

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