नगर निगम में सफाई को लेकर कमशीन खोरी शुरू, चहेतों को दिया जा रहा ठेका
पार्षद अपने लाेगों को ठेका दिलाने कर रहे अनुशंसा
रायपुर:
नगर निगम में पार्षदों के चुनाव के बाद से सफाई ठेका को निरस्त करने का खेल चल रहा है। खेल ऐसा है कि वर्तमान पार्षद अब अपने चहेते ठेकेदारों को ठेका थमाने में लगे हुए है। बकायदा अपने चेहते के नाम अनुशंसा कर रहे हैं। लेकिन वार्डों में जितने कर्मचारी निर्धारित हैं, उतने कर्मचारी फील्ड में तैनात नहीं करवा पा रहे हैं। नतीजा वार्डों की सफाई ढाक के तीन पात की तरह है। बता दें कि पिछले दिनों निगम प्रशासन ने महापौर मीनल चौबे से राय शुमारी के बाद
सभी 70 वार्डों में सफाई कर्मचारियों की निर्धारित संख्या 38 कर दी गई है। यानी बड़े हो या छोटे सफाई कर्मचारियों की संख्या एक समान रहेगी। तो आप सोच सकते हैं कि ऐसे में वार्डों की सफाई व्यवस्था का क्या हाल होगा।
इन वार्डों का ठेका निरस्त
जानकारी के अनुसार जोन छह के अध्यक्ष और वार्ड पार्षद के वार्ड क्रमांक 62, 60, 61 और अन्य वार्डों में लगातार ठेके निरस्त किए जा रहे हैं। विशेष रूप से वार्ड क्रमांक 61 (डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी वार्ड) में अनुराग कंस्ट्रक्शन को 11 जुलाई 2025 को सहमति के आधार पर काम शुरू करने को कहा गया है, लेकिन आज तक उन्हें कोई कार्यादेश जारी नहीं किया गया है। नियमानुसार, इस वार्ड में 38 सफाई कर्मचारियों को 8 घंटे काम करना चाहिए, लेकिन आज सुबह 9:20 बजे तक केवल 8 कर्मचारी और 2 सुपरवाइजर ही मौके पर मिले, जो सुबह 7 बजे से पहले काम पर नहीं लगे थे।
ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे कांग्रेसी नेता
बताया जाता है कि जोन के वार्ड क्रमांक 61 के लिए एक कंस्ट्रक्शन का सहमति पत्र नगर निगम जोन क्रमांक 6 में आया है, लेकिन उसमें न तो आवक-जावक की मुहर है, न ही किसी संबंधित अधिकारी के हस्ताक्षर या कोई पहचान चिन्ह। इससे भी बड़ी बात यह है कि सहमति पत्र में किसी लाभांश का उल्लेख नहीं है। जोन क्रमांक 6 के अन्य वार्डों जैसे 58, 59, 60, 62, 63 और 65 में भी निर्धारित 38 कर्मचारी उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। कांग्रेसी नेताओं का आरोप है कि निगम जोन क्रमांक 6 में केवल खानापूर्ति की जा रही है। सफाई के नाम पर कमीशन खोरी का खेल खेला जा रहा है।
औचक निरीक्षण भी नहीं हो रहा वार्डों की सफाई का
नगर निगम के अधिकारी और जनप्रतिनिधि सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए प्लान बनाते रहते हैं, लेकिन आज तक कोई सुधार नहीं हुआ। यही कारण है कि स्वच्छता रैंकिंग में भी सफाई के मामले में कोई सुधार नहीं हुआ है। भले ही सभी पार्षद इंदौर की सफाई व्यवस्था को देख आए और मंत्री तक इसका गुणगान किया, हो लेकिन धरातल पर इसका उलटा नजर आ रहा है।
पहले तो कभी गाहे-बगाहे वार्डों में सफाई व्यवस्था का निगम अधिकारियों द्वारा औचक निरीक्षण किया जाता था,लेकिन पिछले कुछ दिनों से थम गया है।
